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अंतरराज्यीय चोर गिरोह के आरोपी और बरामद सोना-नगदी।
अंतरराज्यीय चोर गिरोह के आरोपी और बरामद सोना-नगदी।
दुर्ग

चोरियों का खुलासा : दुर्ग-भिलाई में दिनदहाड़े चोरी करने वाला गैंग गिरफ्तार, 63.50 लाख का माल बरामद

दुर्ग-भिलाई में दिनदहाड़े सूने मकानों को निशाना बनाने वाले अंतरराज्यीय चोर गिरोह का दुर्ग पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मेरठ से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 400 ग्राम सोना, 3.50 लाख रुपये नगद समेत कुल 63.50 लाख रुपये का मशरूका बरामद किया। आरोपी फेरीवाले बनकर कॉलोनियों में रेकी करते थे और सूने घरों में चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। जांच में खुलासा हुआ कि गैंग दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, नवा रायपुर और जबलपुर तक सक्रिय था। सैकड़ों CCTV फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 19 May 2026, 04:07 PM · अपडेट: 08 Oct 2026, 11:01 PM
दुर्ग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

दुर्ग और भिलाई शहर में पिछले कुछ समय से दिनदहाड़े सूने मकानों में हो रही हाईप्रोफाइल चोरियों ने पुलिस और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। खासकर पॉश कॉलोनियों में लगातार ताले टूटने और लाखों के जेवर-नगदी गायब होने की घटनाओं ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। नेहरू नगर और दुर्ग थाना क्षेत्र में हुई कई वारदातों के बाद पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की। थाना सुपेला और ACCU की संयुक्त टीम को आरोपियों तक पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पुलिस टीम ने घटनास्थलों के आसपास लगे सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और संदिग्ध गतिविधियों की जांच के दौरान पुलिस को एक एक्टिवा वाहन पर संदेह हुआ। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपी चोरी की वारदातों के लिए अलग-अलग शहरों में लगातार मूवमेंट कर रहे थे। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और नेटवर्क ट्रैकिंग के आधार पर उत्तरप्रदेश के मेरठ और दिल्ली तक दबिश दी।

मेरठ से मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

जांच के दौरान पुलिस ने मेरठ निवासी हासीम खान को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपी ने कबूल किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर बिलासपुर से एक्टिवा क्रमांक CG 10 AK 4136 खरीदी थी और उसी वाहन से दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में रेकी कर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। आरोपी ने यह भी बताया कि गिरोह के सदस्य कुछ समय से रायपुर के मोदहापारा इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कपड़ा और गलीचा बेचने वाले फेरीवालों का भेष बनाकर कॉलोनियों में घूमते थे। इसी दौरान वे यह पता लगाते थे कि किस मकान में ताला लगा है और कौन-सा घर लंबे समय से सूना पड़ा है। मौका मिलते ही गैंग दिनदहाड़े ताला तोड़कर घर के भीतर घुस जाता था। चोरी के दौरान एक आरोपी बाहर निगरानी करता था जबकि दूसरा अंदर जाकर जेवर, नगदी और कीमती सामान समेट लेता था। वारदात के बाद आरोपी तुरंत शहर बदल देते थे ताकि पुलिस को सुराग न मिले।

दुर्ग से लेकर बिलासपुर, नवा रायपुर और जबलपुर तक फैला नेटवर्क

पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि गैंग ने केवल दुर्ग-भिलाई ही नहीं बल्कि बिलासपुर के तिफरा, नवा रायपुर और मध्यप्रदेश के जबलपुर में भी चोरी की कई वारदातों को अंजाम दिया है। आरोपी लगातार शहर बदलकर काम करते थे और किराए के मकानों में ठहरते थे। इससे पुलिस को उनकी गतिविधियों का पता लगाने में काफी मुश्किलें आ रही थीं।जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि चोरी किए गए सोने के जेवर मेरठ के एक ज्वेलर्स को बेचे जाते थे। इसके बाद पुलिस ने मेरठ निवासी सलीम खान पिता अब्बास खान उम्र 28 वर्ष को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपी सलीम ज्वेलर्स का संचालन करता था और चोरी का माल खरीदकर उसे गलाने का काम करता था। पुलिस ने उसके कब्जे से करीब 400 ग्राम सोना, जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई जा रही है, और 3 लाख 50 हजार रुपये नगद बरामद किए हैं।

पुलिस ने 63.50 लाख रुपये का मशरूका किया जब्त

दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कुल 63 लाख 50 हजार रुपये का मशरूका बरामद किया है। बरामद सामान में सोने के जेवर, नगदी और चोरी में इस्तेमाल किया गया वाहन शामिल है। गिरफ्तार मुख्य आरोपी हासीम खान पिता जब्बार खान उम्र 24 वर्ष निवासी श्याम नगर रोड, शालीमार गार्डन गली नंबर 1 मेरठ उत्तरप्रदेश का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं और उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। मेरठ और भोपाल पुलिस की मदद से कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।इस पूरे मामले में पुलिस की तकनीकी जांच, लोकेशन ट्रैकिंग और CCTV फुटेज सबसे बड़े हथियार साबित हुए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधी अब चाहे कितनी भी चालाकी से शहर बदलें या पहचान छिपाने की कोशिश करें, डिजिटल निगरानी और तकनीकी जांच से बचना बेहद मुश्किल हो गया है। दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई को प्रदेश में हाल के समय की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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