छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पिछले तीन दिनों से ठप पड़ी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था आखिरकार आज से बहाल हो गई है। रामकी ग्रुप के सफाई कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल खत्म कर काम पर वापसी कर ली है। हालांकि, आज सुबह काम की शुरुआत होने से पहले कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच जमकर हाईवोल्टेज ड्रामा और विवाद देखने को मिला।
आज सुबह करीब 5 बजे जब सफाईकर्मी काम पर लौटने के लिए डिपो पहुंचे, तो कंपनी प्रबंधन ने उन्हें काम पर रखने से साफ मना कर दिया। प्रबंधन के इस अड़ियल रुख के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और कर्मचारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। काफी देर तक चली तीखी बहस और निगम प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद शहर में कचरा कलेक्शन की गाड़ियां रवाना हो सकीं।
जब कचरा गाड़ी चलाकर सड़क पर उतरे नेता प्रतिपक्ष
सफाई व्यवस्था ठप होने से रायपुर की जनता त्रस्त थी। इस बीच सियासत भी गरमा गई। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। चार दिनों से वार्डों में कचरा नहीं उठने से नाराज आकाश तिवारी खुद कचरा गाड़ी (टिपर) चलाकर वार्ड की गलियों में निकल पड़े और कचरा इकट्ठा किया। उन्होंने निगम सरकार की विफलता और कुप्रबंधन को लेकर तीखा हमला बोला।
₹9,750 के बदले मिल रहे सिर्फ 7-8 हजार
कर्मचारियों की इस हड़ताल के पीछे वेतन में बड़ी गड़बड़ी का मामला है।
कर्मचारियों का आरोप: पिछले 8 सालों से उनके वेतन में लगातार हेरफेर की जा रही है।
वेतन का गणित: कर्मचारियों के मुताबिक, नगर निगम द्वारा कंपनी को प्रति सफाईकर्मी ₹9,750 का भुगतान किया जाता है, लेकिन कंपनी उन्हें सिर्फ ₹7,000 से ₹8,000 ही थमा रही है।
जांच की मांग: कर्मचारियों ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की मांग की है। हालांकि, मंगलवार को रामकी ग्रुप के साथ हुई लंबी बैठक के बाद कर्मचारी काम पर लौटने को राजी हुए थे, लेकिन आज सुबह फिर से विवाद खड़ा हो गया था।
"नगर निगम ने दबा रखे हैं ₹78 करोड़"
इस पूरे विवाद पर DSW रामकी कंपनी ने अपनी लाचारी जताते हुए ठीकरा नगर निगम पर फोड़ दिया है। कंपनी का दावा है कि:
"नगर निगम ने मार्च 2025 से लेकर अब तक कंपनी का करीब ₹78 करोड़ का भुगतान अटका रखा है। निगम की ओर से सिर्फ आंशिक (टुकड़ों में) भुगतान किया जा रहा है, जबकि डीजल का खर्च, गाड़ियों का मेंटेनेंस और कर्मचारियों का वेतन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में संकट खड़ा होना लाजिमी है।"
कंपनी के चालकों (ड्राइवर्स) का भी कहना है कि वे लंबे समय से वेतन वृद्धि और समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन निगम और कंपनी के बीच के इस कछुआ चाल रवैये के कारण उन्हें हमेशा भुगतना पड़ता है।
स्वच्छता सर्वेक्षण टीम के दौरे से पहले साख पर बट्टा
तीन दिनों तक शहर से कचरा नहीं उठने के कारण रायपुर के प्रमुख चौक-चौराहों और रिहायशी इलाकों में कचरे के पहाड़ खड़े हो गए थे, जिससे बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ गया था।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि रायपुर में केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण टीम का दौरा प्रस्तावित है। ऐसे ऐन वक्त पर शहर की सफाई व्यवस्था चरमराने से रायपुर की रैंकिंग पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था। फिलहाल कचरा उठना शुरू हो गया है, लेकिन पेंडिंग पड़े कचरे को पूरी तरह साफ करने में निगम को अगले 24 से 48 घंटे का अतिरिक्त समय लग सकता है।

