NH-353 to NH-53 जोड़ने वाली सड़क को जोड़ने वाली लगभग 17 किलोमीटर लंबी सड़क की हालत बदहाल से भी बदतर हो चुकी है। पूरे मार्ग में सैकड़ों गड्ढे बन चुके हैं, जिनमें कई की गहराई एक से डेढ़ फीट तक है। स्थिति यह है कि एक गड्ढा ही वाहन को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है, जबकि यहां हर कुछ दूरी पर ऐसे खतरनाक गड्ढे मौजूद हैं।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लगभग हर गड्ढे से बचने के लिए वाहनों को सड़क के किनारे उतारकर धीरे-धीरे निकालना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। कई गड्ढे अचानक सामने आ जाते हैं, जिससे वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता और गाड़ी सीधे गड्ढे में उतर जाती है।
इस वजह से वाहन मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है—सस्पेंशन, टायर और अन्य पार्ट्स बार-बार खराब हो रहे हैं। कई लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
खतरनाक स्थान
पचरी गांव:- बस्ती के बीच बड़ा गड्ढा और गांव के बाहर छिलपावन की तरफ
पचरी गांव के बीचों-बीच स्थित गड्ढे को पाटने के लिए डस्ट और गिट्टी डाली गई थी, लेकिन अब दूसरी जगह पानी भरने लगा है, जिससे वहां भी नया गड्ढा बनने की स्थिति बन गई है। यहां भी वाहनों को किनारे से निकालना मजबूरी बन गई है।
एक जागह एसी केी ट्रक भी धीरे से निकलते आसानी से देखा जा सकता है
छिलपावन पेट्रोल पंप:- गहरा और खतरनाक गड्ढा
यहां बना गड्ढा इतना गहरा है कि वाहनों को बहुत सावधानी से निकालना पड़ता है। लोग किनारे से गाड़ी उतारकर धीरे-धीरे निकलते हैं, फिर भी नुकसान का खतरा बना रहता है।
पुनः पधारें चिढ़ाते हुए बोर्ड
इसी स्थान पर छत्तीसगढ़ शासन का बोर्ड लगा है, जिस पर “पुनः पधारें” और “पधारने के लिए धन्यवाद” लिखा है। लेकिन सड़क की जर्जर हालत को देखते हुए यह स्लोगन राहगीरों के लिए चिढ़ाते किसी तंज से कम नहीं लगता।

सड़क पूरी तरह उखड़ी
यहां सड़क इतनी खराब है कि वाहन गुजरते समय बुरी तरह हिलते हैं। यात्रियों को झटके लगते हैं और कई बार गाड़ी सीधे गड्ढे में उतर जाती है।
पूरे 17 किमी में गड्ढों की भरमार
पूरा रास्ता गड्ढों से भरा पड़ा है। कई गड्ढे अचानक सामने आ जाते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों के टकराने का खतरा भी बना रहता है।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति
कई बार गड्ढों को मुरम, गिट्टी और डस्ट से भरकर बराबर किया गया, लेकिन हर बार यह सामग्री निकल जाती है और गड्ढे पहले से ज्यादा गहरे हो जाते हैं। इससे साफ है कि कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
विभागीय लापरवाही का खुला उदाहरण
राहगीरों का कहना है कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वर्षों से गड्ढे जस के तस बने हुए हैं, लेकिन न पक्की मरम्मत हो रही है और न ही सड़क का पुनर्निर्माण।
लोगों का आरोप है कि केवल कागजी कार्यवाही में सुधार दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
