अंबिकापुर स्थित कमोदा रिसॉर्ट एक बार फिर विवादों में आ गया है। आरोप है कि इस रिसॉर्ट का निर्माण करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर किया गया है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि करीब 45 डिसिमल से अधिक सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर रिसॉर्ट परिसर खड़ा किया गया है। इस मामले की शिकायत पहले सरगुजा कलेक्टर से की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि निर्माण को लेकर कई स्तरों पर अनियमितताएं हो सकती हैं।
तहसील स्तर की जांच और अतिक्रमण की पुष्टि
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार स्तर पर भी जांच की गई थी। तहसीलदार न्यायालय की कार्यवाही में यह निष्कर्ष निकला कि रिसॉर्ट संचालक द्वारा लगभग 45 डिसिमल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। यह रिपोर्ट करीब छह महीने पहले दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी मौके पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। कार्रवाई में देरी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे, जिसके चलते मामला दोबारा उच्च प्रशासन तक पहुंचा।
कलेक्टर के निर्देश पर मौके पर पहुंची टीम
लगातार शिकायतों के बाद सरगुजा कलेक्टर ने एसडीएम अंबिकापुर और राजस्व विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम वनसिंह नेताम के नेतृत्व में राजस्व टीम मौके पर पहुंची। टीम ने करीब चार घंटे तक सरकारी जमीन और रिसॉर्ट परिसर का सीमांकन किया और वास्तविक स्थिति की जांच की। प्रारंभिक जांच के आधार पर अतिक्रमण की पुष्टि के बाद कार्रवाई की तैयारी शुरू की गई।

कार्रवाई के दौरान विवाद और विरोध
जैसे ही प्रशासन ने जेसीबी मशीन लगाकर अतिक्रमित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की, मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत भी मौके पर पहुंच गए। रिसॉर्ट संचालक और उनके परिजनों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें पहले कोई उचित नोटिस नहीं दिया गया था। उनका यह भी दावा था कि इसी जमीन के आधार पर बैंक से लोन मिला है और नगर निगम से निर्माण की अनुमति प्राप्त है।
प्रशासन की अस्थायी वापसी और आगे की प्रक्रिया
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासनिक टीम बिना कार्रवाई किए वापस लौट गई। एसडीएम वनसिंह नेताम ने बताया कि रिसॉर्ट संचालक को दो दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दोबारा की जाएगी। हालांकि, संभावना जताई जा रही है कि रिसॉर्ट संचालक इस मामले को न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं, जिससे आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अधीन हो सकती है और फिलहाल यह मामला फिर से लंबा खिंच सकता है।
