देशभर में बढ़ती गर्मी और लू के बीच शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे मौसम में हेल्दी और पारंपरिक पेय पदार्थों की अहमियत फिर से बढ़ गई है । इसी कड़ी में एफएसएसएआई ने महाराष्ट्र की पारंपरिक ड्रिंक ‘आंबील’ को गर्मी से बचाव का असरदार तरीका बताया है और इसकी आसान रेसिपी भी साझा की है।
रेसिपी
महाराष्ट्र में लंबे समय से इस्तेमाल की जाने वाली यह ड्रिंक रागी, छाछ और पानी से तैयार की जाती है । साधारण सामग्री से बनने के बावजूद यह पोषण से भरपूर और शरीर को ठंडक देने वाली मानी जाती है। एफएसएसएआई के अनुसार, यह पेय पदार्थ न सिर्फ शरीर को ठंडा रखता है बल्कि गर्मी के दौरान ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है ।
वयस्कों के लिए
आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में 1 से 2 गिलास (लगभग 200–250 ml प्रति गिलास) आंबील लेना पर्याप्त माना जाता है। इसे आप दोपहर के समय या धूप से आने के बाद ले सकते हैं, क्योंकि उस समय शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन की ज्यादा जरूरत होती है।
बच्चों और बुजुर्गो के लिए
बच्चों के लिए लगभग 100–150 ml पर्याप्त होता है, जबकि बुजुर्गों को भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। बहुत ज्यादा ठंडी या फ्रिज में रखी आंबील पीने से बचें, हल्की ठंडी या सामान्य तापमान पर लेना बेहतर रहता है।
आंबील की खासियत इसका मुख्य घटक रागी है, जिसे एक पोषक मिलेट माना जाता है। इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स के साथ-साथ कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं । यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और दिनभर एनर्जी बनाए रखने में सहायक होता है । खास बात यह है कि रागी ग्लूटेन-फ्री होता है, इसलिए यह उन लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प है जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी होती है
और्वेदिक महत्त्व
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी रागी को बेहद फायदेमंद माना गया है । यह शरीर के पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे अंदरूनी गर्मी कम होती है और शरीर में ठंडक बनी रहती है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
इस ड्रिंक में इस्तेमाल होने वाली छाछ भी सेहत के लिए उतनी ही उपयोगी है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है और पाचन तंत्र को मजबूत करती है। छाछ में मौजूद कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में सहायक होते हैं।
पिने में स्वास्थ्यवर्धक
पानी, जो इस पेय का तीसरा मुख्य हिस्सा है, शरीर को हाइड्रेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्मी में पसीने के कारण शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों की भरपाई पानी के जरिए होती है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। आंबील में डाले जाने वाले मसाले जैसे हींग, अदरक, हरी मिर्च और मेथी पत्ते पाचन को बेहतर बनाते हैं। ये गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पारंपरिक पेय न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा को भी दर्शाते हैं। हालांकि, किसी भी चीज की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना जरूरी है, ताकि इसके फायदे पूरी तरह मिल सकें।

