राजधानी स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में घिर गया है। पूर्व में बर्खास्त किए गए प्रोफेसर शाहिद अली की कथित पुनर्नियुक्ति को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार प्रोफेसर शाहिद अली को पूर्व में कथित दस्तावेजी अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोपों के चलते सेवा से पृथक किया गया था। उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई थी। बताया जाता है कि मामले में शिकायत दर्ज कराने सहित प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी।
अब उनकी पुनर्नियुक्ति की चर्चाओं के बाद विश्वविद्यालय के भीतर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच यह चर्चा है कि यदि पूर्व की कार्रवाई उचित थी तो पुनर्नियुक्ति किन आधारों पर की गई। वहीं यदि अब उन्हें राहत दी जा रही है तो पूर्व में की गई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक पुनर्नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया को लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय परिसर में इस विषय को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इधर, इस पूरे मामले को लेकर डॉ. आशुतोष मिश्रा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में लिखित शिकायत की है। शिकायत में कुलपति डॉ. मनोज दयाल सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिन आरोपों के आधार पर पूर्व में कार्रवाई की गई थी, उसी मामले में अब पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया कई सवाल खड़े करती है। डॉ. मिश्रा ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
उधर, शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि छात्रों और शिक्षकों के बीच संस्थान की विश्वसनीयता बनी रहे। हालांकि, इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

