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बड़ा फैसला : वीजा-फ्री प्रवास अवधि घटाई, भारतीय पर्यटक पर असर

थाईलैंड ने 93 देशों के लिए 60 दिन की वीजा-फ्री एंट्री अवधि घटाकर 30 दिन करने का फैसला लिया है। इस बदलाव का असर भारतीय पर्यटकों पर भी पड़ सकता है। थाई सरकार का कहना है कि सुरक्षा और वीजा नियमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

कीर्तिमान नेटवर्क
20 May 2026, 04:55 PM
📍 थाईलैंड
थाईलैंड ने विदेशी पर्यटकों के लिए अपनी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। थाईलैंड सरकार ने 93 देशों के नागरिकों को दी जा रही 60 दिन की वीजा-फ्री एंट्री सुविधा में कटौती को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत अब अधिकांश देशों के पर्यटकों के लिए वीजा-मुक्त प्रवास की अवधि घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी, जबकि कुछ देशों के नागरिकों के लिए यह सीमा केवल 15 दिन तक सीमित रह सकती है। इस फैसले का असर भारतीय पर्यटकों पर भी पड़ने वाला है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में थाईलैंड भारतीयों के सबसे पसंदीदा विदेशी पर्यटन स्थलों में शामिल रहा है। बैंकॉक, फुकेट, पटाया, क्राबी और चियांग माई जैसे शहरों में हर साल बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक छुट्टियां मनाने, हनीमून, फैमिली ट्रिप और शॉपिंग के लिए पहुंचते हैं। आसान वीजा नियम, कम खर्च और कम दूरी के कारण थाईलैंड भारतीयों के लिए सबसे सुविधाजनक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों में गिना जाता रहा है।

महामारी के बाद शुरू हुई थी 60 दिन की छूट

थाईलैंड ने जुलाई 2024 में अपनी अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत करने और महामारी के बाद पर्यटन उद्योग को पटरी पर लाने के लिए 60 दिन की वीजा-फ्री एंट्री योजना शुरू की थी। उस समय कोविड महामारी के कारण पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ था। होटल उद्योग, ट्रैवल एजेंसियां, स्थानीय बाजार और समुद्री पर्यटन पूरी तरह प्रभावित हुए थे। सरकार ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अमेरिका, इजरायल, यूरोप के शेंगेन देशों और कई एशियाई देशों समेत 93 देशों के नागरिकों को लंबी अवधि तक बिना वीजा रहने की अनुमति दी थी। इससे थाईलैंड में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी और पर्यटन उद्योग को बड़ा आर्थिक सहारा मिला। नीति के कारण बड़ी संख्या में डिजिटल नोमैड्स, रिमोट वर्कर्स और लंबी अवधि तक रहने वाले पर्यटक भी थाईलैंड आने लगे थे। इससे होटल, रेस्टोरेंट, नाइटलाइफ, ट्रांसपोर्ट और लोकल बिजनेस को काफी फायदा हुआ।

अब बदले गए नियम

थाई सरकार का कहना है कि इस योजना का कई लोगों द्वारा गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार कुछ विदेशी नागरिक पर्यटन वीजा का उपयोग लंबे समय तक अवैध रूप से रहने, बिना अनुमति काम करने, अवैध कारोबार करने और इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन करने के लिए कर रहे थे। सरकारी प्रवक्ता रचादा धनादिरेख ने कहा कि पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार अब पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था और इमिग्रेशन नियंत्रण को भी मजबूत करना चाहती है। इसी वजह से थाईलैंड सरकार अब फिर से “टियर वीजा सिस्टम” यानी स्तरीय वीजा व्यवस्था लागू कर रही है, जिसमें अलग-अलग देशों और यात्रियों के लिए अलग प्रवास अवधि और नियम तय किए जाएंगे।

भारतीय पर्यटकों पर असर 

भारत से हर साल लाखों लोग थाईलैंड घूमने जाते हैं। आसान वीजा नीति और कम बजट में विदेशी यात्रा की सुविधा के कारण यह भारतीय मध्यम वर्ग, युवाओं और हनीमून कपल्स के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय पर्यटकों को अपनी यात्रा की बेहतर योजना बनानी होगी। लंबे समय तक रुकने वालों को अतिरिक्त अनुमति या अलग श्रेणी के वीजा की आवश्यकता पड़ सकती है। ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि अब यात्रियों को होटल बुकिंग, वापसी टिकट और प्रवास अवधि के नियमों पर अधिक ध्यान देना होगा।  छोटी छुट्टियों के लिए जाने वाले पर्यटकों पर इसका असर सीमित रहेगा, लेकिन लंबे समय तक रहने वाले यात्रियों और रिमोट वर्क करने वालों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।  भारत को किस श्रेणी में रखा जाएगा और भारतीयों के लिए अंतिम नियम क्या होंगे। इसी कारण ट्रैवल इंडस्ट्री और पर्यटक थाई सरकार की अगली आधिकारिक गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं।

थाईलैंड की अर्थव्यवस्था

थाईलैंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत से अधिक बताया जाता है। लाखों लोगों की आजीविका सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन उद्योग से जुड़ी हुई है। महामारी के दौरान जब अंतरराष्ट्रीय यात्रा लगभग बंद हो गई थी, तब थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा था। होटल खाली हो गए थे, पर्यटन व्यवसाय ठप हो गया था और लाखों लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई थीं। इसी कारण सरकार लगातार विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। थाई अधिकारियों ने इस वर्ष लगभग 33.5 मिलियन विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है।

सुरक्षा और पर्यटन के बीच संतुलन 

 थाईलैंड अब पर्यटन को बढ़ावा देने और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर सरकार विदेशी पर्यटकों से होने वाली आय को बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वह अवैध गतिविधियों, फर्जी वीजा उपयोग और लंबे समय तक बिना अनुमति रहने वाले विदेशी नागरिकों पर नियंत्रण भी चाहती है। इसी कारण नई वीजा नीति को केवल इमिग्रेशन बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

पर्यटन पर पड़ेगा असर

ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वीजा नियमों में बदलाव का असर कुछ समय के लिए पर्यटकों की संख्या पर पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो लंबी छुट्टियों, रिमोट वर्क या लंबी अवधि के प्रवास के लिए थाईलैंड जाते थे।  थाईलैंड की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि पर्यटक वहां जाना पूरी तरह बंद नहीं करेंगे। खूबसूरत समुद्र तट, नाइटलाइफ, शॉपिंग, स्ट्रीट फूड और सस्ती यात्रा सुविधाओं के कारण थाईलैंड अब भी एशिया के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल रहेगा।  आने वाले समय में थाईलैंड अलग-अलग देशों के लिए अलग वीजा अवधि और नई शर्तें लागू कर सकता है। इससे सरकार को पर्यटन और सुरक्षा दोनों पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।  भारतीय पर्यटकों, एयरलाइंस कंपनियों और ट्रैवल एजेंसियों की नजर थाई सरकार की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है, क्योंकि नए नियम दक्षिण एशियाई पर्यटकों की यात्रा योजनाओं को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
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