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महा-कनेक्टिविटी : जबलपुर-मंडला-चिल्पी नेशनल हाईवे बनेगा स्मार्ट फोरलेन, मार्च 2027 तक तैयार होगी DPR

जबलपुर-मंडला-चिल्पी NH-30 को स्मार्ट फोरलेन बनाने की तैयारी तेज हो गई है। करीब 160 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच यात्रा सुरक्षित, तेज और आसान होगी। घाटों के ब्लैक स्पॉट खत्म करने, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन-व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
17 May 2026, 11:46 AM
जबलपुर

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच का सफर अब न सिर्फ बेहद आसान होने जा रहा है, बल्कि यह दोनों राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई जीवनरेखा भी बनेगा। दोनों राज्यों को आपस में जोड़ने वाले जबलपुर-मंडला-चिल्पी नेशनल हाईवे (NH-30) के एक बड़े हिस्से को अब 'स्मार्ट' फोरलेन में बदलने की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस लगभग 160 किलोमीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस DPR को मार्च 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है। इस हाईवे के बनने से जबलपुर (महाकौशल) से छत्तीसगढ़ के कवर्धा और रायपुर की दूरी का समय लगभग आधा रह जाएगा।

अब हादसों के ब्लैक स्पॉट होंगे खत्म

इस पूरे प्रोजेक्ट में सबसे मुश्किल और संवेदनशील हिस्सा पहाड़ी घाटियों का है। नाग घाट, भवाल घाट और चिल्पी घाट जैसे पहाड़ी इलाकों में अक्सर तीखे मोड़ और कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। नए 'स्मार्ट' फोरलेन प्रोजेक्ट में इन घाटों को पूरी तरह से री-डिजाइन किया जा रहा है:

  • खतरनाक मोड़ों का खात्मा: अंधा मोड़ (Blind spots) को पूरी तरह सीधा या चौड़ा किया जाएगा ताकि सामने से आ रहे वाहन साफ दिखें।

  • हाई-टेक विजिबिलिटी: धुंध और रात के समय सुरक्षित ड्राइविंग के लिए आधुनिक रिफ्लेक्टर्स और एंटी-फॉग लाइटिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा।

  • क्रैश बैरियर: घाटों की ढलान और गहरी खाइयों की तरफ अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले मजबूत मेटल और कंक्रीट क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे।

  • स्मार्ट ड्रेनेज: बारिश के दिनों में पहाड़ों से होने वाले जलभराव और भूस्खलन (Landslide) को रोकने के लिए एडवांस ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा।

वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

यह हाईवे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (MP) और भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य (CG) के बफर जोन और कॉरिडोर के करीब से गुजरता है। इसे ध्यान में रखते हुए NHAI पर्यावरण मंजूरी (Environment Clearance) पर विशेष ध्यान दे रहा है।

अपडेट: इस प्रोजेक्ट को एक 'इको-फ्रेंडली ग्रीन कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जा रहा है। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में अंडरपास (Eco-ducts) और ओवरपास बनाए जा सकते हैं, ताकि सड़क हादसों में किसी जानवर को नुकसान न पहुंचे और पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।

आर्थिक और औद्योगिक क्रांति का बनेगा जरिया

जबलपुर से चिल्पी तक का यह फोरलेन निर्माण सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक कॉरिडोर है।

क्षेत्रपरियोजना से होने वाले बड़े फायदे
पर्यटनजबलपुर के भेड़ाघाट, मंडला के कान्हा किसली और छत्तीसगढ़ के भोरमदेव मंदिर आने वाले पर्यटकों को वर्ल्ड-क्लास कनेक्टिविटी मिलेगी।
व्यापारमध्य प्रदेश के कृषि उत्पाद और छत्तीसगढ़ के खनिज-औद्योगिक सामानों का परिवहन तेज और सस्ता हो जाएगा।
रोजगारनिर्माण कार्य के दौरान और हाईवे के किनारे लॉजिस्टिक्स पार्क, ढाबे और फ्यूल स्टेशनों के खुलने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
बेहतर सड़क, सुरक्षित यात्रा, मजबूत कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ लेकर चल रही यह परियोजना देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का एक संतुलित मॉडल पेश कर रही है। यदि तय समय सीमा यानी मार्च 2027 तक DPR के बाद इसका निर्माण कार्य समय पर पूरा होता है, तो यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सुनहरे भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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