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आदिवासी भूमि विवाद में पुलिस जांच
आदिवासी भूमि विवाद में पुलिस जांच
महासमुंद

राजस्व विभाग : बिना रजिस्ट्री दस्तावेजों में हेरफेर कर आदिवासी  जमीन का नामांतरण, आरोपी फरार

महासमुंद जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र के ग्राम डोंगरीपाली (कैलाशपुर) में आदिवासी भूमि के कथित फर्जी नामांतरण और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता जमुना बरिहा ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन को संदिग्ध तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर आर्थिक लाभ लिया गया।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
22 May 2026, 01:07 PM
📍 पिथौरा

महासमुंद जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डोंगरीपाली (कैलाशपुर) में आदिवासी भूमि के कथित फर्जी नामांतरण और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर आर्थिक लाभ लेने का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर पिथौरा पुलिस ने एक नामजद आरोपी सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। मामला ग्राम डोंगरीपाली स्थित भूमि खसरा नंबर 614/1 से संबंधित बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रार्थिया जमुना बरिहा ने पिथौरा थाना में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि उनके नाम दर्ज भूमि को फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध प्रक्रिया के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया। शिकायत के बाद पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें तहसील कार्यालय से प्राप्त अभिलेख, पटवारी प्रतिवेदन एवं राजस्व रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध किया।

राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितता के आरोप

बताया गया कि संबंधित भूमि वर्ष 2013-14 के राजस्व रिकॉर्ड में जमुना बरिहा के नाम पर दर्ज थी। आरोप है कि वर्ष 2014 के बाद उक्त भूमि का नामांतरण कथित रूप से अनियमित एवं संदिग्ध तरीके से किया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि नामांतरण की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा राजस्व अभिलेखों में फेरबदल कर दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज करा दिया गया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि नामांतरण के बाद संबंधित भूमि से जुड़े दस्तावेजों का उपयोग विभिन्न शासकीय एवं बैंकिंग प्रक्रियाओं में किया गया। आरोप है कि उक्त भूमि के आधार पर आर्थिक लाभ भी लिया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक नुकसान उठाना पड़ा है।

पुलिस ने दर्ज किया अपराध

पुलिस जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि मामला केवल कागजी हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि बदले गए अभिलेखों के आधार पर आगे कई प्रक्रियाएं भी संचालित की गईं। इसी आधार पर पिथौरा पुलिस ने जगत राम पटेल एवं अन्य अज्ञात सहयोगियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 61(2) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व अभिलेखों, बैंक दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान यदि अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

राजनीतिक गलियारों में भी बढ़ी चर्चा

इधर राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उल्लेखनीय है कि मामले में नामजद आरोपी जगत राम पटेल, आम आदमी पार्टी के यूथ विंग के जिलाध्यक्ष खिरोद पटेल के पिता बताए जा रहे हैं। खिरोद पटेल पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं और कई मामलों में सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अब विपक्षी हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब स्वयं के परिवार पर गंभीर आरोप लगे हों, तब दूसरों पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगाना कितना उचित है। हालांकि इस पूरे मामले में अंतिम सत्य जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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