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दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद
दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद
छत्तीसगढ़

शादी का झांसा : कृषि विस्तार अधिकारी को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- धोखा देकर शोषण अक्षम्य

छत्तीसगढ़ की एक विशेष अदालत ने देवनारायण साहू को अपनी कॉलेज सहेली के साथ दुष्कर्म और जातिगत उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पाया कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का झूठा वादा कर पीड़िता का शोषण किया और बाद में उसकी जाति के आधार पर उसे अपमानित कर संबंध से इनकार कर दिया। उसे भारतीय न्याय संहिता और SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत सजा दी गई, जिसमें उम्रकैद, अन्य कारावास और जुर्माना शामिल है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 04 May 2026, 09:48 AM · अपडेट: 18 May 2026, 12:00 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ की एक विशेष अदालत ने सामाजिक न्याय और महिला सुरक्षा के मद्देनजर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने बालोद निवासी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को अपनी कॉलेज सहेली के साथ दुष्कर्म करने और जातिगत टिप्पणी कर उसे प्रताड़ित करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की कोर्ट ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया।

दोस्ती से दगाबाजी तक का सफर

मामले की जड़ें जगदलपुर के एग्रीकल्चर कॉलेज से जुड़ी हैं, जहाँ पीड़िता और आरोपी साथ पढ़ते थे। पढ़ाई के दौरान ही देवनारायण ने पीड़िता के सामने प्रेम प्रस्ताव रखा था। शुरुआती दौर में पीड़िता ने अंतरजातीय संबंधों की जटिलताओं को देखते हुए मना कर दिया था, लेकिन आरोपी ने सुनहरे भविष्य और सरकारी नौकरी के बाद विवाह करने का अटूट विश्वास दिलाया।

सरकारी वकील उमाशंकर वर्मा के अनुसार, आरोपी ने फरवरी 2021 में रायपुर के धरमपुरा स्थित एक किराए के मकान में पीड़िता को बुलाकर पहली बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद, वह लगातार शादी का झांसा देकर पीड़िता का शारीरिक शोषण करता रहा।

सत्ता और पद मिलते ही बदला रंग

साल 2024 में जब आरोपी देवनारायण साहू का चयन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर हुआ, तो उसके तेवर पूरी तरह बदल गए। जिस युवती को उसने जीवनसाथी बनाने का वादा किया था, उसे वह उसकी जाति (सतनामी समाज) के नाम पर अपमानित करने लगा। हद तो तब हो गई जब नौकरी लगने के बाद भी उसने पीड़िता को मानपुर बुलाया और पुनः झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

दिसंबर 2025 में आरोपी ने अंतिम बार पीड़िता को रायपुर बुलाकर साफ कह दिया कि, "हमारे यहाँ सतनामी लड़की से शादी नहीं होती।" उसने न केवल पीड़िता के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाई, बल्कि किसी अन्य युवती से विवाह करने की बात कहकर उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया।

अदालत की सख्त टिप्पणी और सजा का विवरण

सुनवाई के दौरान पीड़िता के परिवार (माँ और भाई) ने मजबूती से गवाही दी। मेडिकल साक्ष्यों और डॉक्टर की रिपोर्ट ने भी अभियोजन के पक्ष को पुख्ता किया। अदालत ने पाया कि आरोपी शुरू से ही पीड़िता की जाति से वाकिफ था, इसके बावजूद उसने केवल शारीरिक शोषण के उद्देश्य से प्रेम का नाटक किया।

न्यायालय ने निम्नलिखित धाराओं में सजा सुनाई:

  • SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(5): आजीवन कारावास (उम्रकैद)।

  • BNS की धारा 64(2)(M): 10 साल का कठोर कारावास।

  • BNS की धारा 69: 10 साल का कठोर कारावास।

  • अर्थदंड: 6,000 रुपये का जुर्माना।

सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शिक्षित होकर सरकारी पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा किया गया ऐसा कृत्य समाज में गलत संदेश देता है, इसलिए आरोपी किसी भी प्रकार की सहानुभूति का पात्र नहीं है।

न्याय की जीत

यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो विवाह का झूठा वादा कर महिलाओं का शोषण करते हैं और बाद में जाति या सामाजिक स्थिति का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। पीड़िता को मिले इस न्याय ने कानून के प्रति आम जनता के विश्वास को और सुदृढ़ किया है।

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