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समाधान शिविर का बहिष्कार करते सरपंच
समाधान शिविर का बहिष्कार करते सरपंच
रायपुर

शिविर में विवाद : 16 पंचायतों का बड़ा फैसला, तहसीलदार को हटाने तक आंदोलन की चेतावनी

गरियाबंद जिले के अमलीपदर क्षेत्र में सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविर विवादों में घिर गया। 16 पंचायतों के सरपंचों ने तहसीलदार गेंद लाल साहू पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए झरगांव शिविर का बहिष्कार कर दिया। सरपंचों का कहना है कि भोजन व्यवस्था करने के बावजूद उन्हें खाने के दौरान उठाया गया, जिसे उन्होंने जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया। तहसीलदार ने मंच से माफी मांगी, लेकिन सरपंच कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। वहीं ग्रामीणों ने एक पटवारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगाकर उसके तबादले की मांग भी उठाई है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
14 May 2026, 04:15 PM
रायपुर

छत्तीसगढ़ में 1 मई से 10 जून तक आयोजित किए जा रहे सुशासन तिहार के तहत गांव-गांव और शहरों में समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां आम लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। लेकिन गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील क्षेत्र में यह अभियान विवादों में घिर गया है। यहां 16 पंचायतों के सरपंचों ने एकजुट होकर झरगांव में आयोजित समाधान शिविर का बहिष्कार कर दिया। सरपंचों ने तहसीलदार गेंद लाल साहू पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल हटाने की मांग की है।

सरपंचों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि 7 मई को अमलीपदर में आयोजित समाधान शिविर में भोजन की व्यवस्था स्थानीय पंचायतों ने मिलकर की थी। कार्यक्रम के दौरान जब कुछ सरपंच भोजन करने बैठे, तब तहसीलदार गेंद लाल साहू ने कथित रूप से उन्हें वहां से उठ जाने के लिए कह दिया। इस घटना से सरपंच नाराज हो गए और इसे जनप्रतिनिधियों का सार्वजनिक अपमान बताया।

16 पंचायतों के सरपंच हुए लामबंद

घटना के विरोध में अमलीपदर क्षेत्र की 16 पंचायतों के सरपंच एक मंच पर आ गए। सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बहिष्कार के दौरान सरपंचों ने चेतावनी दी कि जब तक तहसीलदार को हटाया नहीं जाता, तब तक वे कई सरकारी कार्यक्रमों से दूरी बना सकते हैं।

विवाद बढ़ने के बाद तहसीलदार गेंद लाल साहू ने सार्वजनिक मंच से सफाई दी। उन्होंने कहा कि पहचान नहीं होने की वजह से यह स्थिति बनी और उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था। उन्होंने मंच से माफी मांगते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन सरपंचों का गुस्सा कम नहीं हुआ। उनका कहना है कि केवल माफी से मामला खत्म नहीं होगा।

सरपंच संघ ने कहा- यह पूरे जनप्रतिनिधियों का अपमान

सरपंच संघ अध्यक्ष हालमन ध्रुवा और पदाधिकारी हेमोबाई नागेश ने कहा कि यह मामला केवल दो सरपंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों का पूरा जिम्मा पंचायत प्रतिनिधि उठाते हैं और बदले में उन्हें अपमान सहना पड़े, यह स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इसी समाधान शिविर में धारणीधोड़ा और मदागमड़ा गांव के ग्रामीणों ने भाजपा नेता गोवर्धन मांझी को एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में हल्का नंबर 17 के पटवारी सत्यम सोनकर पर काम के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने पटवारी के तत्काल तबादले की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।

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