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खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग जानकारी देते हुए
खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग जानकारी देते हुए
रायपुर

एंटी-डोपिंग अभियान : रायपुर में क्रिकेटरों को डोपिंग से बचने के बताए गए तरीके, NADA ने किया जागरूक

रायपुर में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) ने एंटी-डोपिंग सेमिनार आयोजित कर 200 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को डोपिंग नियमों, प्रतिबंधित दवाओं और सप्लीमेंट के इस्तेमाल में सावधानियों की जानकारी दी। NADA विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिंह ने खिलाड़ियों को दवा लेने से पहले जांच और जिम्मेदारी के बारे में जागरूक किया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 15 Jul 2026, 12:33 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 02:53 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
रायपुर में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) ने खिलाड़ियों को डोपिंग के नियमों और इससे जुड़े खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए एंटी-डोपिंग सेमिनार का आयोजन किया। होटल मैरियट में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिंह ने करीब 200 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
सेमिनार में पुरुष और महिला वर्ग के अलग-अलग आयु समूहों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। डॉ. नेहा सिंह ने खिलाड़ियों को बताया कि मैदान पर बेहतर प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई दवाएं और न्यूट्रिशन सप्लीमेंट कभी-कभी अनजाने में प्रतिबंधित पदार्थ शरीर तक पहुंचा सकते हैं, जिससे खिलाड़ी डोपिंग नियमों के उल्लंघन में फंस सकता है।

दवा और सप्लीमेंट लेने से पहले जांच जरूरी

कार्यक्रम में खिलाड़ियों को बताया गया कि किसी भी दवा या सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले उसकी जांच करना बेहद जरूरी है। डॉ. सिंह ने प्रतिबंधित दवाओं, खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट से जुड़े जोखिमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि NADA के नियमों के तहत कोई भी न्यूट्रिशन सप्लीमेंट पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। कई बार सप्लीमेंट में प्रतिबंधित तत्व पाए जाते हैं या लेबलिंग में गलतियां सामने आती हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

एंटी-डोपिंग सेमिनार
खिलाड़ी की होती है पूरी जिम्मेदारी

सेमिनार में एंटी-डोपिंग नियमों के ‘स्ट्रिक्ट लाइबिलिटी’ सिद्धांत की जानकारी भी दी गई। इसके अनुसार खिलाड़ी के शरीर में प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर उसकी जिम्मेदारी खिलाड़ी की ही मानी जाती है, भले ही वह पदार्थ अनजाने में ही शरीर में पहुंचा हो। इसी वजह से खिलाड़ियों को सलाह दी गई कि वे किसी भी दवा, सप्लीमेंट या उपचार को शुरू करने से पहले पूरी जानकारी जरूर हासिल करें और विशेषज्ञों से सलाह लें। कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों को NADA के ‘नो योर मेडिसिन (KYM)’ प्लेटफॉर्म के बारे में भी बताया गया। इस माध्यम से खिलाड़ी यह पता कर सकते हैं कि कोई दवा प्रतिबंधित सूची में शामिल है या नहीं।

NADA के KYM प्लेटफॉर्म की दी जानकारी

NADA की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि आयुर्वेदिक, हर्बल और अन्य प्राकृतिक सप्लीमेंट भी हमेशा सुरक्षित नहीं होते। इनमें भी प्रतिबंधित पदार्थ मौजूद होने की संभावना रहती है, इसलिए इनके इस्तेमाल में सावधानी जरूरी है। क्रिकेट में डोपिंग के मामले अन्य खेलों की तुलना में कम सामने आते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सख्ती को देखते हुए खेल संस्थाएं अब खिलाड़ियों को शुरुआती दौर से ही जागरूक कर रही हैं। CSCS का यह प्रयास भी इसी दिशा में एक कदम है, ताकि खिलाड़ी नियमों की सही जानकारी के साथ खेलें और किसी अनजानी गलती की वजह से उनका करियर प्रभावित न हो।
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