अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में जांच लगातार तेज हो रही है। विशेष जांच दल यानी एसआईटी को अब एक और संदिग्ध व्यक्ति के बारे में अहम सबूत मिले हैं। यह व्यक्ति खुद को मंदिर निर्माण कार्य में लगी कंपनी का कर्मचारी बताता है। अब इसकी भूमिका और बढ़ रही संपत्तियों की जांच शुरू हो गई है।
संदेह के घेरे में आए महेश कुमार का ताल्लुक बस्ती जिले से है। वह मंदिर चोरी के मुख्य आरोपी रामशंकर यादव टिन्नू के घर पर किराए से रहता था। स्थानीय लोगों के अनुसार इन दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और वे अक्सर साथ देखे जाते थे। महेश की ड्यूटी मंदिर की गणना कक्ष में तो नहीं थी, लेकिन वह अकाउंट्स और टेलीशीट का काम संभालता था।
सैलरी कम, लेकिन निवेश करोड़ों में
महेश कुमार के बारे में जो जानकारी सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। शिकायत के अनुसार उसकी मासिक आय मात्र 15 से 18 हजार रुपये है। बावजूद इसके, उसने एक साल के भीतर ही अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियों का अंबार लगा दिया है। उसने अपनी पत्नी, भाई और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर बस्ती, अयोध्या, लखनऊ और प्रयागराज में लगभग 20 अचल संपत्तियां खरीदी हैं।
जमीन खरीदने में लगा करोड़ों का निवेश
शिकायतकर्ता ने एसआईटी को दस्तावेजों के साथ सबूत सौंपे हैं। महेश कुमार ने 12 जून को बस्ती के पास भारी मात्रा में जमीन खरीदी है। बताया जा रहा है कि एक साल के भीतर उसने करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई है। यह सवाल अब बड़ा हो गया है कि इतनी कम कमाई वाला व्यक्ति इतनी भारी रकम कहां से लाया। फिलहाल, एसआईटी इन सभी कागजातों और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच कर रही है।कंपनी ने पल्ला झाड़ा
इस पूरे मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब संबंधित निर्माण कंपनी के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। कंपनी के परियोजना निदेशक विनोद कुमार मेहता ने साफ किया है कि उनकी कंपनी में इस नाम और पते का कोई व्यक्ति कार्यरत ही नहीं है। ऐसे में महेश कुमार का असली परिचय और उसकी पहुंच को लेकर रहस्य और गहरा गया है। अब पुलिस प्रशासन और एसआईटी पूरी सक्रियता से इस जाल को सुलझाने में जुटी है।