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पासपोर्ट और भारतीय नागरिकता पर सरकार का बयान
पासपोर्ट और भारतीय नागरिकता पर सरकार का बयान
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केंद्र का बड़ा बयान : पासपोर्ट सिर्फ यात्रा दस्तावेज, नागरिकता का प्रमाण नहीं

केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं होता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस स्थिति को पूरी तरह साफ किया है। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत केवल विदेश यात्रा के लिए यह दस्तावेज जारी किया जाता है।

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प्रकाशित: 15 Jul 2026, 12:42 PM · अपडेट: 01 Oct 2026, 11:06 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

केंद्र सरकार ने एक बार फिर पासपोर्ट को लेकर एक बहुत बड़ा बयान जारी किया है। सरकार ने साफ शब्दों में दोहराया है कि पासपोर्ट किसी भी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं होता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि कानून के मुताबिक भारत सरकार देश से बाहर यात्रा करने के लिए अपने नागरिकों को यह दस्तावेज जारी करती है। 

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह एक यात्रा संबंधी दस्तावेज है जो पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही लोगों को मिलता है। इसका पूरा संचालन पासपोर्ट अधिनियम 1967 और पासपोर्ट नियम 1980 के तहत किया जाता है। एक अन्य चौंकाने वाले आंकड़े में प्रवक्ता ने बताया कि हमारे देश में कुल आबादी के 8% से भी कम नागरिकों के पास इस समय वैध पासपोर्ट उपलब्ध है। यही कारण है कि आम जनता के बीच एक नई बहस छिड़ गई है।

जानिए जून महीने में सरकार ने पहली बार क्या कहा था

इससे पहले 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर भी विदेश मंत्रालय ने यही बात कही थी। तब सरकार ने स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट केवल एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट यानी यात्रा का माध्यम है, नागरिकता का पक्का सबूत नहीं। यह बयान असल में चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया के दौरान सामने आया था। इसमें सवाल उठा था कि क्या चुनाव संबंधी कार्यों में पासपोर्ट को नागरिकता के पक्के सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

 वर्ष 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया

मंत्रालय ने इस दौरान वर्ष 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया था, जिसमें अदालत ने भी पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण मानने से साफ मना कर दिया था। अधिकारियों ने इस पर एक अहम तकनीकी पहलू भी समझाया है। कानून के अनुसार यदि जनहित में कभी जरूरत पड़ती है, तो केंद्र सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है जो मूल रूप से भारत का नागरिक नहीं है। यही सबसे बड़ी वजह है कि इसे नागरिकता का अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के बयान पर कांग्रेस ने खड़े किए तीखे सवाल

इस नई व्याख्या के बाद मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। विपक्ष ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण ही नहीं है, तो फिर सरकार इसे किस कानूनी आधार पर जारी करती है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने पूछा कि अगर देश का पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं है, तो फिर आम आदमी के पास अपनी नागरिकता साबित करने का असली दस्तावेज कौन सा बचा है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार इस तरह के बयानों से उन लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने की जमीन तैयार कर रही है, जिनसे उनके राजनीतिक मतभेद हैं।

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