सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को एक बार फिर तेज कर दिया है। संसद में आज तीन अहम विधेयक पेश किए गए, जिनका मकसद राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया को तेज करना बताया जा रहा है। इन प्रस्तावों में लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने और नए सिरे से परिसीमन कराने की बात शामिल है। सरकार की योजना के तहत लोकसभा में सांसदों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए देश में परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया फिर से की जाएगी। वर्तमान में लोकसभा सीटों का बंटवारा 1971 की जनगणना के आधार पर है, जिसे अब अपडेट करने की बात कही जा रही है।
तीन अहम विधेयक पेश
सरकार की तरफ से जो तीन विधेयक संसद में लाए गए हैं, वे इस प्रकार हैं—
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
- परिसीमन (डीलिमिटेशन) विधेयक, 2026
इन विधेयकों को 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
महिला आरक्षण कानून का संदर्भ
महिला आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले 1996 में भी ऐसा ही एक बिल पेश किया गया था, जिसे 81वां संविधान संशोधन कहा गया था। उस समय भी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन यह बिल लंबे समय तक अटका रहा और पूरी तरह लागू नहीं हो सका।
बाद में 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास हुआ, जिसे संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया परिसीमन और जनगणना से जोड़ी गई थी।
नया बदलाव क्यों जरूरी बताया जा रहा है
2023 के कानून में कहा गया था कि महिला आरक्षण तभी लागू होगा जब 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन होगा। ऐसे में इसे लागू होने में 2034 के लोकसभा चुनाव तक का समय लग सकता था। सरकार का कहना है कि अब इस प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है ताकि इसे 2029 के चुनाव से पहले लागू किया जा सके।
इसी वजह से नए विधेयक लाकर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और नियमों में संशोधन का प्रयास किया जा रहा है।
संभावित बदलाव
नए प्रस्तावों के लागू होने पर कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं—
- लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी
- आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व मिले
- यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा, जिसे बाद में बढ़ाया भी जा सकता है
- अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा
परिसीमन का मुद्दा
सरकार का कहना है कि नए परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है। इससे लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और उनका वितरण बदलेगा। साथ ही एक परिसीमन आयोग भी गठित किया जाएगा, जो पूरे देश में सीटों का पुनर्निर्धारण करेगा।
विपक्ष की आपत्ति
विपक्षी दलों ने इन तीनों विधेयकों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह कदम चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश हो सकता है। कुछ दलों ने इसे महिलाओं को लुभाने की रणनीति बताया है।
इसके अलावा यह चिंता भी जताई गई है कि अगर परिसीमन नए जनसंख्या अनुपात के आधार पर होता है तो दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु और केरल का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
