पिछले दो दिनों से रायपुर और बिलासपुर के 50 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी अस्पताल में जांच कर रहे हैं। बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। टीम मरीजों के इलाज की हिस्ट्री, आय-व्यय का रिकॉर्ड, अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा विवादों, एंबुलेंस सुविधा और प्रबंधन की कार्यप्रणाली की भी जांच की जा रही है। कांग्रेस पहले से ही अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाती रही है।
एयर एंबुलेंस मामले में लापरवाही
अपोलो अस्पताल से मरीज को एयरलिफ्ट नहीं किए जाने के मामले ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। PWD विभाग में पदस्थ राजकुमार अग्रवाल कोलकाता से लौटने के बाद तबीयत खराब होने पर अपोलो अस्पताल में भर्ती हुए थे। इलाज के बाद भी हालत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने 13 लाख रुपये खर्च कर हैदराबाद ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी।एंबुलेंस नहीं मिलने से बिगड़ी हालत
8 जुलाई की शाम एयर एंबुलेंस बिलासपुर एयरपोर्ट पहुंची थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मरीज को एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए डॉक्टर और एंबुलेंस की मांग की, लेकिन समय पर व्यवस्था नहीं हो सकी। परिवार मरीज को लेकर एयरपोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को हैदराबाद ले जाने से मना कर दिया और उसे वापस अपोलो अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
फर्जी मामले को लेकर भी उठे थे सवाल
अपोलो अस्पताल में कार्यरत रहे फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम का मामला भी जांच के घेरे में रहा है। आरोप था कि उसने खुद को कार्डियोलॉजिस्ट बताकर कई एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की थीं। इस मामले में करीब 27 मरीजों की मौत की बात सामने आई थी। हालांकि पुलिस जांच में अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी गई थी।