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बिरकोना में अधूरे पड़े सरकारी आवास
बिरकोना में अधूरे पड़े सरकारी आवास
बिलासपुर

सरकारी आवासों पर सवाल : करोड़ों की योजना हुई बेकार, 17 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ निर्माण

बिलासपुर के बिरकोना में हाउसिंग बोर्ड द्वारा सरकारी अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे HIG आवास 17 साल बाद भी अधूरे पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन अब खंडहर में बदल चुके हैं। अतिरिक्त बजट नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रुक गया था, जबकि अब इन आवासों को उपयोग में लाने की कवायद फिर शुरू होने की उम्मीद है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 11 Jul 2026, 01:06 PM · अपडेट: 29 Oct 2026, 10:54 PM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सरकारी निर्माण व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। बिरकोना में हाउसिंग बोर्ड द्वारा सरकारी अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे एचआईजी (HIG) आवास करीब 17 साल बाद भी अधूरे पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ये भवन अब खंडहर में बदल चुके हैं। 
साल 2008-09 में सरकारी अधिकारियों के आवास की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से हाउसिंग बोर्ड ने बिरकोना क्षेत्र में एचआईजी आवास निर्माण की योजना बनाई थी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से कोनी क्षेत्र में जमीन का चयन किया गया था। करीब पौने दो करोड़ रुपये की लागत से इन मकानों का निर्माण शुरू कराया गया था। 

अधूरे निर्माण से खंडहर बने आवास

बताया जा रहा है कि आवास निर्माण का काम आधे से अधिक पूरा हो चुका था। भवनों का मुख्य ढांचा तैयार हो गया था और निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका था। इस दौरान सड़क और नाली निर्माण जैसे जरूरी कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ी। हाउसिंग बोर्ड ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की, लेकिन फंड उपलब्ध नहीं हो सका। इसके चलते आवासों का निर्माण आगे नहीं बढ़ पाया और धीरे-धीरे ये भवन उपेक्षा का शिकार होते चले गए। लंबे समय तक देखरेख नहीं होने के कारण इन अधूरे मकानों की हालत खराब हो गई है। बताया जा रहा है कि भवनों में लगे खिड़की-दरवाजे और अन्य सामान भी चोरी हो चुके हैं। अब मौके पर सिर्फ ईंटों से बनी दीवारें ही नजर आती हैं। 

विश्वविद्यालयों को नहीं मिल सका आवास 

एक ओर जहां ये सरकारी आवास खंडहर में बदल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अटल यूनिवर्सिटी और पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को स्टाफ क्वार्टर की जरूरत है। दोनों संस्थानों ने इन मकानों को अपने उपयोग में लेने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। हाउसिंग बोर्ड के एडिशनल कमिश्नर अजीत पटेल ने बताया कि बिरकोना स्थित इन एचआईजी बंगलों को लेकर न्यायपालिका की ओर से मांग आई है। इस संबंध में शासन स्तर पर बातचीत चल रही है। अब देखना होगा कि वर्षों से अधूरे पड़े इन भवनों को दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
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