Bilaspur News: दिवाली के मौके पर नई कार खरीदने की जिद पूरी न होने से खफा एक छात्र ने परिजनों को सबक सिखाने के लिए बेहद चौंकाने वाला कदम उठा लिया। 12वीं में पढ़ने वाले इस छात्र ने सोशल मीडिया रील देखकर खुद के ही अपहरण का पूरा ड्रामा रच डाला और पिता को मैसेज भेजकर डेढ़ लाख रुपये की फिरौती मांग ली। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके और परिजनों में हड़कंप मच गया। हालांकि, बिलासपुर पुलिस की मुस्तैदी और मुस्तैद जांच के चलते महज छह घंटे के भीतर छात्र को सुरक्षित ढूंढ निकालकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। यह पूरी घटना रतनपुर थाना क्षेत्र की है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में रहने वाला 17 वर्षीय किशोर 12वीं का होनहार छात्र है। उसकी मां शासकीय स्कूल में शिक्षिका हैं, जबकि पिता एक निजी विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि छात्र कुछ समय से अपने परिजनों से दिवाली पर एक नई कार दिलाने की लगातार जिद कर रहा था। लेकिन परिजनों ने फिलहाल कार लेने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों की यह मनाही छात्र को इतनी नागवार गुजरी कि उसने अपने ही घर में दहशत फैलाने की साजिश बना डाली।
ट्यूशन के बहाने निकला और भेजा फिरौती का मैसेज
मंगलवार सुबह रोजाना की तरह छात्र ट्यूशन जाने का बहाना बनाकर अपनी स्कूटी से घर से निकला। लेकिन वह ट्यूशन न जाकर लापता हो गया। घर से निकलने के करीब डेढ़ घंटे बाद पिता के मोबाइल पर एक अज्ञात मैसेज आया, जिसमें छात्र के अपहरण का दावा करते हुए उसे सही-सलामत छोड़ने के बदले डेढ़ लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। मैसेज पढ़ते ही शिक्षक पिता के पैर तले जमीन खिसक गई। घबराए परिजन बिना एक पल गंवाए सीधे रतनपुर थाने पहुंचे और पुलिस से मदद की गुहार लगाई।
तालाब के पास मिली स्कूटी, रिश्तेदार के घर से हुआ बरामद
नाबालिग छात्र के अपहरण की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। रतनपुर थाना प्रभारी निलेश पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम तुरंत हरकत में आई और छात्र की लोकेशन तलाशनी शुरू की। छानबीन के दौरान पुलिस को सबसे पहले छात्र की लावारिस स्कूटी चोरहा देवरी गांव में स्थित एक तालाब के पास खड़ी मिली, जिससे पुलिस का संदेह और गहरा गया। लेकिन इसी बीच कहानी में नया मोड़ आया। छात्र ने खुद ही अपने पिता को दोबारा मैसेज कर बताया कि वह ग्राम सेलर में अपने एक रिश्तेदार के घर पूरी तरह सुरक्षित है। यह मैसेज मिलते ही बदहवास परिजनों ने राहत की सांस ली। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और छात्र को थाने ले आई।
सोशल मीडिया रील से आया अपहरण का आइडिया
थाने में परिजनों की मौजूदगी में जब पुलिस ने छात्र से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की, तो पूरी साजिश का सच सामने आ गया। छात्र ने स्वीकार किया कि वह कार न मिलने की वजह से घर वालों से सख्त नाराज था और उन्हें परेशान करने के इरादे से यह फर्जी ड्रामा रचा था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मधुलिका सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि छात्र पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज है, लेकिन उसने इंटरनेट पर एक रील देखकर खुद के अपहरण का यह तरीका सीखा था।
एएसपी ने आगे बताया कि परिजनों को सुरक्षित होने का मैसेज भेजने के बाद छात्र ने उन्हें यह चेतावनी भी दी थी कि अगर अब भी उसे कार लेकर नहीं दी गई, तो वह दोबारा कहीं गायब हो जाएगा। फिलहाल पुलिस ने छात्र और उसके परिजनों की समझाइश व काउंसलिंग कर मामला शांत कराया है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों के बालमन को किस कदर प्रभावित कर रहा है।







