छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राकृतिक आपदा में मुआवजा देने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आंधी, तूफान या तेज बारिश के दौरान कोई व्यक्ति पेड़ से गिरकर जान गंवाता है, तो ऐसी मृत्यु भी प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में मानी जाएगी। इसी आधार पर कोर्ट ने राजस्व विभाग का मुआवजा निरस्त करने वाला आदेश रद्द करते हुए मृतक के परिजन को 30 दिन के भीतर 4 लाख रुपये की राहत राशि देने के निर्देश दिए हैं।
मुआवजे के लिए किया आवेदन
श्यामूराम मंडावी के बेटे अमर सिंह ने राज्य सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत 4 लाख रुपये मुआवजे के लिए आवेदन किया। नायब तहसीलदार ने जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर राहत राशि देने की अनुशंसा भी की। इसके बावजूद अतिरिक्त कलेक्टर ने 1 फरवरी 2021 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि पेड़ से गिरने से हुई मौत पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट में दी गई कानूनी दलील
कोर्ट ने माना प्राकृतिक आपदा का मामला
सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि श्यामूराम मंडावी की मौत सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि आंधी-तूफान और खराब मौसम के दौरान पेड़ से गिरने के कारण हुई थी। इसलिए इसे प्राकृतिक आपदा से हुई मृत्यु माना जाएगा और राहत नीति का लाभ मिलना चाहिए।
30 दिन में 4 लाख रुपये देने का आदेश
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त कलेक्टर का आदेश निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अमर सिंह को प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत 30 दिन के भीतर 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। कोर्ट के इस फैसले को प्राकृतिक आपदा से जुड़े मुआवजा मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।