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भाड़म करंट हादसे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सुनवाई
भाड़म करंट हादसे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सुनवाई
बिलासपुर

हाईकोर्ट : करंट लगने से हो रही मौतो पर सरकार ने मांगी पूरी जानकारी

भाड़म गांव में करंट लगने से तीन लोगों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने CSPDCL के एमडी और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र दाखिल कर सुरक्षा व्यवस्था, विद्युत ढांचे के रखरखाव और इलेक्ट्रिक फेंसिंग पर नीति संबंधी जानकारी देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 07 Jul 2026, 09:36 AM · अपडेट: 14 Jul 2026, 12:06 PM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव में करंट लगने से तीन लोगों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है। 
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि शपथपत्र में राज्य के विद्युत ढांचे के निरीक्षण और रखरखाव की वर्तमान व्यवस्था का विस्तृत ब्यौरा दिया जाए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं और लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय करने की क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। 

इलेक्ट्रिक फेंसिंग पर नीति बनाने की जरूरत

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग के कारण लगातार हो रही जान-माल की हानि को रोकने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी नीति बनाई जानी चाहिए। अदालत ने माना कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा मानकों और नियामक व्यवस्था की आवश्यकता है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कई लोग अपनी फसल, पशुधन या संपत्ति की सुरक्षा के लिए खेतों, फार्महाउस, मकानों और अन्य परिसरों के चारों ओर बिजली प्रवाहित करने वाली फेंसिंग लगा देते हैं। ऐसी फेंसिंग की जानकारी न होने पर आम लोग उसके संपर्क में आ जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे और मौत तक हो जाती है। 

इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा 

खंडपीठ ने कहा कि करंट लगने से होने वाली मौतों के मामलों में दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाते हैं, जो कानून के अनुसार आवश्यक भी है। लेकिन ऐसी घटनाओं का लगातार सामने आना यह दर्शाता है कि केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रभावी रोकथाम और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई मामलों में घरेलू पशु और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसलिए मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों और पशुओं की सुरक्षा के लिए भी ठोस नियामक उपाय लागू किए जाने चाहिए। 

सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार से मांगी पूरी जानकारी

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL), रायपुर के मैनेजिंग डायरेक्टर को इस जनहित याचिका में तत्काल प्रतिवादी के रूप में शामिल किया जाए, ताकि मामले में उनका पक्ष भी दर्ज किया जा सके। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से कहा है कि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध और ठोस उपायों की जानकारी दी जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि क्या इलेक्ट्रिक फेंसिंग से जुड़े मामलों के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) या नीति पहले से लागू है। यदि ऐसी व्यवस्था मौजूद नहीं है, तो नई नीति तैयार करने, उसे लागू करने और उसके लिए निर्धारित समयसीमा का स्पष्ट खाका भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
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