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नर्मदा नदी में फंसी खनन मशीनें
नर्मदा नदी में फंसी खनन मशीनें
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बड़ा खुलासा : नर्मदा नदी में अवैध उत्खनन का पर्दाफाश, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

नर्मदा नदी में आई बाढ़ ने अवैध रेत खनन के बड़े नेटवर्क का खुलासा कर दिया। बाढ़ में अवैध रैंप बह गया, जिससे नदी के बीच उतारी गई करोड़ों रुपये की मशीनें फंस गईं। घटना के बाद प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
10 Jul 2026, 03:35 PM
भोपाल

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के सख्त निर्देशों और प्रतिबंधों के बावजूद रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। प्रशासन की नाक के नीचे न केवल नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 

ताजा मामला तब सामने आया, जब नर्मदा नदी में अचानक आई बाढ़ ने अवैध रेत खनन के पूरे नेटवर्क की पोल खोल दी। बाढ़ ने खोली अवैध खनन की परतें मिली जानकारी के अनुसार, यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नर्मदा नदी की प्राकृतिक जलधारा को प्रभावित करते हुए रेत निकालने के लिए एक अस्थायी रैंप तैयार किया गया था।

बाढ़ ने खोली अवैध खनन की परतें

 इसी रास्ते से भारी पोकलेन मशीनें और दर्जनों डंपर नदी के बीच तक पहुंचाए गए थे, जहां लंबे समय से रेत का उत्खनन किया जा रहा था। अचानक आई बाढ़ में बह गया अवैध रैंप इसी दौरान ऊपरी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते आई बाढ़ में कंपनी द्वारा बनाया गया अस्थायी रैंप पूरी तरह बह गया। रास्ता टूटने से नदी के बीच उतारी गई करोड़ों रुपये की पोकलेन मशीनें और डंपर पानी के बीच फंसकर रह गए। 

नदी के बीच फंसी भारी मशीनें

अचानक आई बाढ़ में बह गया अवैध रैंप

फंसी मशीनों ने उठाए प्रशासन पर सवाल बाढ़ के बाद नदी के बीच फंसी भारी मशीनों की तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि एनजीटी के प्रतिबंध लागू थे, तो इतने बड़े स्तर पर नदी के भीतर मशीनें कैसे पहुंच गईं और लंबे समय तक अवैध खनन कैसे चलता रहा। 

फंसी मशीनों ने उठाए प्रशासन पर सवाल

ग्रामीणों ने लगाए सांठगांठ के आरोप स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफियाओं और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह का अवैध कारोबार संभव नहीं है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे अवैध खनन लगातार जारी रहा।  

ग्रामीणों ने लगाए सांठगांठ के आरोप

बड़े हादसे की आशंका, कार्रवाई का इंतजार स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाढ़ के समय मशीनों पर चालक या मजदूर मौजूद होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। साथ ही, नदी की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ के कारण आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। फिलहाल नदी के बीच फंसी मशीनें पूरे मामले की गंभीरता को उजागर कर रही हैं, लेकिन अब तक कंपनी के खिलाफ किसी ठोस कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

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