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मद्रास हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
मद्रास हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
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Karur Stampede Case : करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को नौकरी देने पर रोक नहीं, मद्रास हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने करूर रैली में हुए हादसे के पीड़ितों के परिजनों को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इस हादसे में 41 लोगों की जान गई थी। राज्य सरकार ने इन परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नौकरी देने पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

विशेष संवाददाता
10 Jul 2026, 03:12 PM
चेन्नई

करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु सरकार को बड़ी अंतरिम राहत मिली है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने शुक्रवार को करूर रैली में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने साफ किया कि यह नियुक्तियां फिलहाल अस्थायी रहेंगी और अंतिम फैसला आने के बाद ही इनका भविष्य तय होगा।

जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने कहा कि इस चरण में सरकार के नीतिगत फैसले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी नियुक्तियां याचिकाओं पर अंतिम आदेश के अधीन रहेंगी।

पहले वेतन से पहले होगी सुनवाई.

कोर्ट ने यह भी कहा कि लाभार्थियों को पहला वेतन मिलने से पहले इस मामले में दाखिल सभी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की गई है।

टीएनपीएससी और सीबीआई को भी बनाया पक्ष

मद्रास हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तमिलनाडु लोक सेवा आयोग को भी मामले में प्रतिवादी बनाया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करूर भगदड़ की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।

याचिकाओं में क्या मांग की गई थी

नाम तमिझर काची के नेता थीरन थिरुमुरुगन और मनिथनेय जननायगा काची के पदाधिकारी सीनी अहमद ने अदालत में याचिकाएं दायर की थीं। इनमें करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

फिलहाल जारी रहेंगी नियुक्तियां

अदालत के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया जारी रह सकेगी। हालांकि इन नियुक्तियों का अंतिम निर्णय हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

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