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हाईकोर्ट ने 7 आरोपियों को अग्रिम जमानत दी
हाईकोर्ट ने 7 आरोपियों को अग्रिम जमानत दी
बिलासपुर

शिक्षाकर्मी भर्ती मामला : हाईकोर्ट से सात आरोपियों को अग्रिम जमानत, शर्तों का करना होगा पालन

धमतरी जिले की वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में हाईकोर्ट ने सात आरोपियों को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने जांच में सहयोग, गवाहों को प्रभावित न करने और 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 08 Jul 2026, 03:47 PM · अपडेट: 13 Jul 2026, 12:26 AM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने धमतरी जिले में वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 भर्ती से जुड़े कथित अनियमितता मामले में सात आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान की है। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने सात अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि इसी मामले में समान आरोपों का सामना कर रहे अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समान आधार पर वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी राहत दी जाना उचित है। मामला वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 172 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। 
आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के आधार पर उनके अंक बढ़ाकर उन्हें नियुक्ति दिलाई गई। इसके कारण कई पात्र अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए। इस मामले में वर्ष 2011 में मगरलोड थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया था। 

जमानत देते हुए कोर्ट ने आरोपियों पर लगाईं कई शर्तें

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कई स्तरों की जांच के बाद पूरी की गई थी। लगभग पांच हजार आवेदनों की स्क्रीनिंग और सत्यापन के बाद अंतिम चयन सूची तैयार की गई थी। बचाव पक्ष का कहना था कि पुलिस अब तक ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ताओं ने किसी आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया था। उन्होंने यह भी दलील दी कि शिकायत कई वर्ष बाद किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से की गई थी और इसी मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है। हाईकोर्ट ने सातों आरोपियों को सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए निर्देश दिया कि यदि उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानतदार प्रस्तुत करने पर उन्हें रिहा किया जाएगा। 

कोर्ट की चेतावनी शर्तें तोड़ीं तो जमानत होगी निरस्त

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत निर्धारित शर्तों के पालन के अधीन होगी। अदालत ने सभी आरोपियों को जांच में पूरा सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और ट्रायल के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार के समान अपराध में शामिल न होने की भी शर्त लगाई गई है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी आरोपी द्वारा जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो राज्य सरकार या शिकायतकर्ता अदालत में जमानत निरस्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।
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