महाराष्ट्र के पुणे से एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। पुणे के औद्योगिक क्षेत्र पिंपरी-चिंचवड़ में बुधवार दोपहर को एक बड़ा हादसा हो गया है। यहाँ एक 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (कचरे से ऊर्जा बनाने वाले) प्रोजेक्ट साइट पर निर्माणाधीन इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस अचानक हुए हादसे के बाद पूरी साइट पर चीख-पुकार मच गई। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, मलबे के नीचे करीब 15 से 20 मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद से ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और युद्ध स्तर पर बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
मोशी इलाके में चल रहा था पीपीपी मॉडल प्रोजेक्ट का काम
यह दर्दनाक हादसा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के अंतर्गत आने वाले मोशी इलाके का है।
नगर निगम की ओर से इस क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एक बड़ा कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन प्लांट तैयार किया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और साइट पर मौजूद अन्य लोगों के अनुसार, बुधवार दोपहर को जब रोज़मर्रा की तरह इमारत का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था और कई मजदूर ऊंचाई पर काम कर रहे थे,
तभी अचानक निर्माणाधीन ढांचा भरभरा कर नीचे आ गिरा। मजदूरों को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिल सका।
यह दर्दनाक हादसा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के अंतर्गत आने वाले मोशी इलाके का है।
नगर निगम की ओर से इस क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एक बड़ा कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन प्लांट तैयार किया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और साइट पर मौजूद अन्य लोगों के अनुसार, बुधवार दोपहर को जब रोज़मर्रा की तरह इमारत का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था और कई मजदूर ऊंचाई पर काम कर रहे थे,
तभी अचानक निर्माणाधीन ढांचा भरभरा कर नीचे आ गिरा। मजदूरों को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिल सका।
मौके पर राहत एवं बचाव कार्य तेज, एम्बुलेंस स्टैंडबाय पर
हादसे की भयावहता को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे से फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस प्रशासन और आपदा प्रबंधन की कई टीमें तुरंत राहत सामग्री के साथ मौके पर पहुंच गईं। विशाल मलबे को हटाने और उसके नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारी क्रेनों और कटर मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट की टीम खुद मौके पर मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रही है। मलबे से निकाले जा रहे घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा देने के लिए घटनास्थल पर आधा दर्जन से अधिक एम्बुलेंस को तैयार रखा गया है।
सुरक्षा मानकों पर खड़े हुए सवाल: क्या लापरवाही बनी कारण?
इस गंभीर हादसे के बाद प्रोजेक्ट साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता मलबे में फंसे हर एक जीवन को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मुहैया कराना है। पुलिस विभाग के अनुसार, मलबे को पूरी तरह से हटाए जाने के बाद ही हताहतों या घायलों की सही और आधिकारिक संख्या स्पष्ट हो पाएगी।