छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध समाज सेविका और पद्मश्री से सम्मानित फूलबासन बाई यादव के अपहरण की एक सनसनीखेज कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और चेकिंग अभियान की बदौलत इस बड़ी वारदात को टाल दिया गया। इस मामले में पुलिस ने दो महिलाओं समेत तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
साजिश और अपहरण का घटनाक्रम
यह घटना सुबह लगभग 10 बजे की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेमेतरा से आई खुशबू साहू नामक महिला अपने दो साथियों के साथ फूलबासन बाई के निवास पर पहुँची। उन्होंने किसी 'जरूरी चर्चा' का बहाना बनाकर उन्हें घर से बाहर बुलाया।
जैसे ही फूलबासन बाई चर्चा के लिए उनके पास गईं, आरोपियों ने उन्हें झांसा देकर कार में बैठा लिया। कार में बैठते ही अपहरणकर्ताओं ने दरवाजा लॉक कर दिया और तेजी से गाड़ी आगे बढ़ा दी।
ट्रैफिक पुलिस की सजगता ने पलटा पासा
अपहरणकर्ता फूलबासन बाई को लेकर शहर से बाहर निकलने की फिराक में थे, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। उसी दौरान मार्ग पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा नियमित वाहन चेकिंग की जा रही थी। जैसे ही पुलिस ने संदेह के आधार पर उस कार को रुकने का इशारा किया, फूलबासन बाई ने बिना समय गंवाए अपनी सूझबूझ दिखाई।
उन्होंने तुरंत पुलिसकर्मियों को अपनी ओर आकर्षित किया और इशारा कर बताया कि उनका अपहरण कर लिया गया है। स्थिति को भांपते ही पुलिस ने मोर्चा संभाला और घेराबंदी कर कार सवार तीनों आरोपियों को दबोच लिया।
जांच में जुटी पुलिस
पकड़े गए आरोपियों को सुकुल दैहान पुलिस चौकी के हवाले कर दिया गया है, जहां उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है।
"चूंकि मामला प्रदेश की प्रतिष्ठित हस्ती से जुड़ा है, इसलिए पुलिस इसे बेहद गंभीरता से ले रही है। फिरौती, आपसी रंजिश या किसी अन्य बड़े षड्यंत्र के एंगल से भी जांच की जा रही है।"
वर्तमान में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साजिश के पीछे का मुख्य उद्देश्य क्या था और क्या इसमें कुछ और लोग भी शामिल हैं। फिलहाल, पद्मश्री फूलबासन बाई पूरी तरह सुरक्षित हैं और पुलिस की सक्रियता की चारों ओर सराहना हो रही है।
