प्रदेशभर में आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से चल रहे सुशासन तिहार 2026 के बीच गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक से बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम पाटसिवनी में आयोजित समाधान शिविर के दौरान एक कथित भ्रष्टाचार के मामले पर चर्चा के बीच स्थानीय भाजपा विधायक रोहित साहू के तीखे और आपत्तिजनक बयान ने माहौल गर्मा दिया है।
विधायक ने मंच से कथित घूसखोर पटवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए यहां तक कह दिया कि “ऐसे लोगों को चप्पल से मारना चाहिए।” इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजस्व अमले तक हलचल मच गई है।
समाधान शिविर में शिकायत
जानकारी के मुताबिक, 5 मई को छुरा ब्लॉक के ग्राम पाटसिवनी में सुशासन तिहार के तहत जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया था। इसी दौरान एक ग्रामीण ने मंच पर पहुंचकर पटवारी से संबंधित एक मौखिक शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राजस्व कार्यों के बदले 40 हजार रुपये की रिश्वत ली गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक रोहित साहू ने तत्काल प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए और जांच के बाद FIR दर्ज करने तक की बात कही।
विधायक का तीखा बयान
शिकायत और आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक रोहित साहू ने मंच से बेहद सख्त लहजे में कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ऐसे पटवारियों को “चप्पल से मारना चाहिए।”
विधायक का यह बयान वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। वहीं, इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद गहराता चला गया।

पटवारी संघ का विरोध
विधायक के बयान के विरोध में राजस्व विभाग के कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है। तहसील छुरा पटवारी संघ ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सुशासन तिहार 2026 के कार्यक्रमों से दूरी बनाने का ऐलान किया है।
संघ ने प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि किसी भी मंच से इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिराता है, बल्कि पूरे विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। संघ ने इसे सम्मान के खिलाफ बताते हुए बहिष्कार का निर्णय लिया है।
प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं और समाधान शिविरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं को त्वरित समाधान देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोप और सार्वजनिक मंचों से दिए जा रहे विवादित बयान सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर रिश्वतखोरी के आरोप सही हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल गलत संदेश देता है।
सोशल मीडिया पर भी बहस तेज
विधायक के बयान का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख बता रहे हैं, तो वहीं कई लोग सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा को अनुचित और गैर-जिम्मेदाराना बता रहे हैं।
जिला प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार शिकायत की प्रारंभिक जांच की जा रही है और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुशासन तिहार पर असर की आशंका
इस विवाद का असर अब सुशासन तिहार 2026 के आयोजन और उसकी छवि पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। कर्मचारी संघ के विरोध और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह अभियान सुर्खियों में आ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संयमित भाषा और संस्थागत प्रक्रिया का पालन जरूरी है, ताकि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित न हो।
