सरगुजा जिले में हाल ही में आयोजित खेलो
इंडिया ट्राइबल्स गेम्स में जनजातीय समाज के युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन
किया। लेकिन इन सबके बीच मध्यप्रदेश के झाबुआ के 10 साल के मासूम खिलाड़ी आयुष ने मलखंभ
में अपने अद्भुत प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा।
पहली बार राष्ट्रीय मंच पर धमाकेदार
शुरुआत
आयुष, जो 3rd क्लास में पढ़ाई करता है, ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर के खेलों में शिरकत की। सीमित संसाधनों के बावजूद मलखंभ जैसे कठिन खेल में अपने योग और जिम्नास्टिक कौशल से प्रतियोगियों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि यदि भीतर प्रतिभा है और मेहनत का जज्बा है, तो उम्र और संसाधन कोई बाधा नहीं बन सकते।
कैसे शुरू हुआ आयुष का सफर?
आयुष ने बताया कि उन्होंने मलखंभ की शुरुआत अपने स्कूल से ही की थी। स्कूल की शिक्षक अंजली मैम ने उन्हें इस खेल के लिए प्रेरित किया और नियमित प्रशिक्षण दिया। किसी बाहरी कोचिंग के बजाय आयुष ने स्कूल में ही अभ्यास जारी रखा। अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में आयोजित इस प्रतियोगिता में आयुष ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना प्रदर्शन किया और जजों को भी प्रभावित किया।
परिवार का पूरा समर्थन
आयुष के पिता और माता दोनों ही हॉस्टल में वार्डन के रूप में कार्यरत हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने बेटे को खेल और पढ़ाई दोनों में आगे बढ़ने के लिए पूरा समर्थन दिया।
पुलिस बनने का सपना
छोटी सी उम्र में ही आयुष के बड़े सपने हैं। वह आगे चलकर पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता है। खेल के साथ-साथ वह पढ़ाई पर भी ध्यान दे रहा है। आयुष की कहानी यह संदेश देती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन और मेहनत से छोटे शहर और गांवों के बच्चे भी राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का महत्व
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजन ऐसे ही प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर देते हैं कि वे अपनी क्षमता दिखा सकें और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकें। आयुष जैसे युवा खिलाड़ियों की मेहनत और लगन आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के खेलों के भविष्य को उज्जवल बनाने में मदद करेगी।
