साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां हाई कोर्ट के एक वकील को 103 करोड़ रुपए के डिमांड ड्राफ्ट का झांसा देकर 3 करोड़ की ठगी कर ली गई। मामला चकरभाठा थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने हरियाणा निवासी आरोपी नवीन जून को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
झांसे की शुरुआत: “विदेशी निवेश” का सपना दिखाया
आरोपी ने खुद को बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा बताकर वकील को विश्वास में लिया। उसने लंदन की रहने वाली ग्रेस डेविड नाम की महिला का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में कैंसर अस्पताल और सुपर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल खोलने का प्रस्ताव रखा। बातचीत के दौरान आरोपी ने दावा किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 103 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट (DD) जारी किया जाएगा।
किस्तों में वसूली: प्रोसेसिंग से क्लीयरेंस तक
आरोपी ने डीडी जारी करने के नाम पर अलग-अलग बहाने बनाकर रकम ऐंठनी शुरू की।
- प्रोसेसिंग फीस
- टैक्स और चार्जेस
- आरबीआई क्लीयरेंस
- एंबेसी अप्रूवल
इन सबके नाम पर पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में करीब 3 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए।
फर्जी सिस्टम से रचा गया हाईटेक जाल
- जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पूरी ठगी को बेहद प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दिया।
- व्हाट्सएप कॉल और चैट
- फर्जी ईमेल आईडी
- बैंक, एंबेसी और आरबीआई के नाम से नकली दस्तावेज
- इनके जरिए ऐसा माहौल बनाया गया कि पूरा प्रोसेस असली लगे और पीड़ित को शक न हो।
पुलिस की कार्रवाई: तकनीकी जांच से गिरफ्तारी
पीड़ित की शिकायत पर चकरभाठा पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी नवीन जून को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपी के पास से: थार वाहन, मोबाइल फोन, लैपटॉप, अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस का बयान: एडिशनल एसपी पंकज पटेल के अनुसार, आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से लंबे समय तक संपर्क में रहकर ठगी को अंजाम दिया। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं और कितने लोग इसके शिकार हुए हैं।
सावधान! इस तरह के फ्रॉड से बचें
- “बड़ी रकम मिलने” या “विदेशी निवेश” के ऑफर से सतर्क रहें
- किसी भी डील में पैसे देने से पहले आधिकारिक पुष्टि करें
- बैंक, आरबीआई या एंबेसी के नाम पर मांगे गए पैसे की जांच जरूर करें
- अनजान ईमेल, लिंक और कॉल से दूरी रखें
