अंतरिक्ष में घूम रहे एस्टेरॉयड यानी बड़े चट्टानी पिंड एक बार फिर चर्चा में हैं। 14 मई 2026 को दो बड़े एस्टेरॉयड पृथ्वी के पास से गुजरने वाले हैं, जबकि 18 मई को एक और एस्टेरॉयड पृथ्वी के काफी करीब आएगा। हालांकि इन खबरों को सुनकर लोगों के मन में डर पैदा हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि इनमें से किसी भी एस्टेरॉयड से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। यह पूरी तरह सुरक्षित अंतरिक्षीय घटना है। NASA और दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार इन एस्टेरॉयड पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे एस्टेरॉयड अक्सर पृथ्वी के पास से गुजरते रहते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में वे सुरक्षित दूरी पर होते हैं। इस बार खास बात यह है कि एक ही हफ्ते में कई एस्टेरॉयड पृथ्वी के नजदीक से गुजरेंगे, इसलिए अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता है।
एस्टेरॉयड क्या हैं
एस्टेरॉयड अंतरिक्ष में मौजूद बड़े पत्थर या धातु जैसे पिंड होते हैं, जो सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इन्हें आम भाषा में “अंतरिक्षीय चट्टान” भी कहा जाता है। कुछ एस्टेरॉयड छोटे पत्थर जितने होते हैं, जबकि कुछ का आकार कई किलोमीटर तक हो सकता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि ये एस्टेरॉयड करोड़ों साल पहले सौर मंडल के निर्माण के समय बचे हुए टुकड़े हैं। ज्यादातर एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच मौजूद “एस्टेरॉयड बेल्ट” में पाए जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी कक्षा पृथ्वी के पास से गुजरती है। इन्हें “नियर-अर्थ एस्टेरॉयड” कहा जाता है।
14 मई को कौन-कौन से एस्टेरॉयड गुजरेंगे
NASA के अनुसार 14 मई को 2026 JV1 और 2026 JT नाम के दो एस्टेरॉयड पृथ्वी के पास से गुजरेंगे। 2026 JV1 यह एस्टेरॉयड लगभग 22 मीटर बड़ा बताया जा रहा है। यानी इसका आकार एक छोटे हवाई जहाज के बराबर माना जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पृथ्वी से लगभग 27 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा। 2026 JT दूसरा एस्टेरॉयड 2026 JT करीब 18 मीटर आकार का है। यह पृथ्वी से लगभग 65 लाख किलोमीटर की दूरी से निकलेगा। अंतरिक्ष विज्ञान के हिसाब से इन्हें “क्लोज फ्लाईबाय” कहा जाता है, लेकिन आम लोगों के लिए यह दूरी बेहद ज्यादा है। इसलिए किसी तरह का खतरा नहीं माना जा रहा।
18 मई को पृथ्वी के और करीब आएगा 2026 JH2
14 मई के बाद वैज्ञानिकों की नजर 18 मई को गुजरने वाले एस्टेरॉयड 2026 JH2 पर भी रहेगी। यह एस्टेरॉयड बाकी दोनों की तुलना में पृथ्वी के ज्यादा करीब आएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी से लगभग 91 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। तुलना करें तो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी करीब 3.84 लाख किलोमीटर होती है। यानी यह एस्टेरॉयड चंद्रमा की दूरी से भी काफी कम दूरी पर दिखाई देगा। इसी वजह से वैज्ञानिक इस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि इसके पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है।
14 मई के बाद वैज्ञानिकों की नजर 18 मई को गुजरने वाले एस्टेरॉयड 2026 JH2 पर भी रहेगी। यह एस्टेरॉयड बाकी दोनों की तुलना में पृथ्वी के ज्यादा करीब आएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी से लगभग 91 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। तुलना करें तो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी करीब 3.84 लाख किलोमीटर होती है। यानी यह एस्टेरॉयड चंद्रमा की दूरी से भी काफी कम दूरी पर दिखाई देगा। इसी वजह से वैज्ञानिक इस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि इसके पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है।
कितना बड़ा है 2026 JH2
शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस एस्टेरॉयड का आकार करीब 16 से 35 मीटर तक हो सकता है। यानी यह एक बड़ी बस, कई मंजिला इमारत या छोटे विमान जितना बड़ा हो सकता है। आकार बड़ा होने की वजह से वैज्ञानिक इसकी गति और दिशा पर लगातार नजर रख रहे हैं। यह एस्टेरॉयड अमेरिका के एरिज़ोना स्थित माउंट लेमन सर्वे समेत कई वेधशालाओं ने ट्रैक किया है। यह संस्था खास तौर पर उन अंतरिक्षीय वस्तुओं पर नजर रखती है, जो पृथ्वी के पास से गुजरती हैं।
वैज्ञानिक का तर्क
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि जब खतरा नहीं है तो वैज्ञानिक इतने ध्यान से निगरानी क्यों करते हैं असल में एस्टेरॉयड का अध्ययन सिर्फ खतरे का अनुमान लगाने के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने के लिए भी जरूरी होता है। इनके आकार, दिशा, गति और चमक का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि करोड़ों साल पहले सौर मंडल कैसे बना था। इसके अलावा यदि भविष्य में कभी कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए खतरा बनता है, तो उसकी पहले से पहचान करना बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से NASA और दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियां हर समय अंतरिक्ष पर नजर रखती हैं।
अगर एस्टेरॉयड टकराए तो क्या हो सकता है
वैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे एस्टेरॉयड अक्सर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर खत्म हो जाते हैं। कई बार लोग इन्हें टूटते तारे की तरह देखते हैं। लेकिन अगर कोई बहुत बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी से टकराए, तो उससे भारी नुकसान हो सकता है। इसी कारण अंतरिक्ष एजेंसियां संभावित खतरनाक एस्टेरॉयड की सूची बनाकर लगातार निगरानी करती रहती हैं। हालांकि मौजूदा एस्टेरॉयड्स को लेकर ऐसा कोई खतरा नहीं बताया गया है।
क्या आम लोग इन्हें देख पाएंगे
वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ एस्टेरॉयड इतने छोटे होते हैं कि उन्हें सामान्य आंखों से देखना संभव नहीं होता। इन्हें देखने के लिए शक्तिशाली टेलीस्कोप की जरूरत पड़ती है। हालांकि खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग ऑनलाइन लाइव टेलीस्कोप प्रोजेक्ट्स और अंतरिक्ष वेधशालाओं के जरिए इन घटनाओं को देख सकते हैं।
NASA ने लोगों से क्या कहा
NASA और वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि लोगों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सोशल मीडिया पर कई बार एस्टेरॉयड से जुड़ी खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जिससे डर फैलता है।
लेकिन इस बार गुजरने वाले 2026 JV1, 2026 JT और 2026 JH2 पूरी तरह सुरक्षित हैं और पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना डरने की नहीं, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने और जानने का मौका है।

