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स्कूलों में अब व्यावसायिक प्रशिक्षण
स्कूलों में अब व्यावसायिक प्रशिक्षण
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बड़ा बदलाव : किताबी ज्ञान के साथ अब हुनर की बारी, स्कूलों में बदली शिक्षा की तस्वीर

जिले के सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अब केवल किताबी शिक्षा नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रिकल जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल सिखाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर या स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए तैयार करना है। स्कूलों में वर्कशॉप और विशेषज्ञों के माध्यम से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

कीर्तिमान न्यूज
11 May 2026, 01:49 PM
मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अक्सर संसाधनों की कमी, शिक्षकों के अभाव या जर्जर भवनों के कारण चर्चा में रहती है। हालांकि, इन चुनौतियों के बीच राज्य के सरकारी स्कूलों से एक सकारात्मक और भविष्योन्मुखी बदलाव की खबर सामने आ रही है। अब प्रदेश के छात्र केवल परीक्षाओं के लिए रट्टा नहीं मार रहे, बल्कि स्कूलों में उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) दिया जा रहा है।

डिग्री के साथ अब हाथों में होगा हुनर

सागर जिले के सरकारी स्कूलों में शुरू हुई यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP) के जमीनी क्रियान्वयन का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहाँ छात्रों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर ऑपरेशन और तकनीकी कार्यों की बुनियादी जानकारी दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र केवल नौकरियों के भरोसे न रहें, बल्कि उनके पास ऐसा कौशल हो जिससे वे अपना भरण-पोषण स्वयं कर सकें।

क्लास में खुल रहे हैं इंजन

इस नई व्यवस्था के तहत सबसे दिलचस्प नजारा स्कूलों की वर्कशॉप में देखने को मिल रहा है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को बाइक और अन्य वाहनों के पुर्जों के बारे में विस्तार से समझाया जा रहा है। छात्र अब केवल कागज पर इंजन का चित्र नहीं बना रहे, बल्कि वे समझ रहे हैं कि:

  • इंजन असल में काम कैसे करता है?

  • वाहनों की छोटी-मोटी तकनीकी खराबियों को कैसे दूर किया जाए?

  • आईटी और इलेक्ट्रिकल क्षेत्र की बेसिक जरूरतें क्या हैं?

समय-समय पर स्कूलों में बाहरी विशेषज्ञों को भी बुलाया जा रहा है, जो छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देते हैं। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य परिवारों से आने वाले बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

सिर्फ डिग्री काफी नहीं

शिक्षकों का भी मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना रोजगार की गारंटी नहीं है। स्किल बेस्ड शिक्षा ही वह सेतु है जो छात्रों को सीधे बाजार और रोजगार से जोड़ सकती है। इस ट्रेनिंग से छात्र भविष्य में या तो किसी कंपनी में बेहतर अवसर पा सकेंगे या अपना खुद का छोटा स्टार्टअप या वर्कशॉप शुरू कर पाएंगे।

मध्य प्रदेश सरकार का यह फोकस शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में प्रदेश के हर स्कूल में व्यावसायिक कोर्स अनिवार्य रूप से दिखाई देंगे, जो युवाओं को 'बेरोजगार स्नातक' बनने के बजाय 'कुशल पेशेवर' बनाने में मदद करेंगे।

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