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AI : IMD ने लॉन्च किए AI आधारित मौसम सिस्टम, अब 1 किलोमीटर दायरे तक मिलेगी सटीक भविष्यवाणी

IMD ने AI आधारित नया मौसम सिस्टम लॉन्च किया है, जिससे अब 1 किलोमीटर के दायरे तक सटीक मौसम पूर्वानुमान मिल सकेगा। यह तकनीक किसानों, आम लोगों और आपदा प्रबंधन के लिए मददगार होगी। फिलहाल इसका पायलट प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में शुरू किया गया है।

कीर्तिमान नेटवर्क
13 May 2026, 05:10 PM
📍 नई दिल्ली
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मौसम पूर्वानुमान की दुनिया में बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। अब मौसम की जानकारी पहले से कहीं ज्यादा सटीक और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। IMD ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित नए मौसम पूर्वानुमान सिस्टम लॉन्च किए हैं, जिनकी मदद से अब मौसम की भविष्यवाणी केवल जिला या शहर स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 1 किलोमीटर के दायरे तक सटीक जानकारी दी जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत जैसे विशाल और कृषि प्रधान देश के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। खासकर किसानों, ग्रामीण इलाकों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
अब तक कई बार ऐसा होता था कि मौसम विभाग जिले के लिए बारिश या तूफान की चेतावनी जारी करता था, लेकिन जिले के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति अलग निकलती थी। नई AI तकनीक इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है।

AI की मदद से बदलेगी मौसम पूर्वानुमान 

अब तक मौसम विभाग बड़े क्षेत्र या जिले के आधार पर पूर्वानुमान जारी करता था। लेकिन भारत जैसे बड़े देश में एक ही जिले के अलग-अलग इलाकों का मौसम काफी अलग हो सकता है। कहीं भारी बारिश होती है तो कुछ किलोमीटर दूर सूखा बना रहता है। यही वजह है कि किसानों और आम लोगों को कई बार सही और समय पर जानकारी नहीं मिल पाती थी। नई AI तकनीक की मदद से अब मौसम विभाग बहुत छोटे क्षेत्र यानी माइक्रो लेवल पर मौसम का विश्लेषण कर सकेगा। इसका मतलब यह है कि अब किसी गांव, खेत, कस्बे या इलाके के हिसाब से मौसम की अलग-अलग जानकारी दी जा सकेगी।

AI सिस्टम का काम 

  1.  तापमान का विश्लेषण करेगा
  2.  बारिश की संभावना बताएगा
  3.  तेज हवा और आंधी की जानकारी देगा
  4.  बिजली गिरने की चेतावनी जारी करेगा
  5.  स्थानीय मौसम पैटर्न को समझेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक तेजी से बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के दौर में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

 उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट

IMD द्वारा लॉन्च किए गए दो AI आधारित सिस्टम में से एक को फिलहाल उत्तर प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।उत्तर प्रदेश भारत के सबसे बड़े कृषि राज्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में मौसम की सटीक जानकारी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस परियोजना के तहत
  1.  गांव स्तर तक मौसम की जानकारी पहुंचाई जाएगी
  2.  किसानों को फसल आधारित अलर्ट दिए जाएंगे
  3.  स्थानीय प्रशासन को पहले से चेतावनी मिलेगी
  4.  बाढ़ और आंधी जैसी स्थितियों पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

नई AI आधारित मौसम प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत में खेती काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है और अचानक बारिश, ओलावृष्टि, तेज आंधी या सूखे जैसी परिस्थितियों की वजह से किसानों की फसलें कई बार बर्बाद हो जाती हैं। ऐसे में AI आधारित सटीक मौसम पूर्वानुमान किसानों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। इस तकनीक की मदद से किसान बुवाई का सही समय तय कर सकेंगे, सिंचाई की बेहतर योजना बना पाएंगे और भारी बारिश या तूफान जैसी स्थितियों से पहले तैयारी कर सकेंगे। इसके अलावा किसान कीटनाशक और खाद डालने का सही समय भी तय कर पाएंगे, जिससे फसल नुकसान कम होगा और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ेगी। यदि किसानों को खेत स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी, तो इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ सकता है।

भविष्य में पूरे देश में हो सकता है विस्तार

यदि उत्तर प्रदेश में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो IMD भविष्य में इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांव और खेत स्तर तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचने से भारत जैसे कृषि प्रधान देश को बड़ा फायदा मिलेगा। नई तकनीक के जरिए अब मौसम की भविष्यवाणी केवल “जिले में बारिश होगी” तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह बताया जा सकेगा कि किस गांव, खेत या इलाके में कब और कितनी बारिश होने वाली है। यही वजह है कि IMD की यह नई AI पहल भारत में मौसम विज्ञान और कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। AI आधारित मौसम प्रणाली आपदा प्रबंधन में भी बनेगी बड़ी ताकत
AI आधारित मौसम प्रणाली सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि यह भविष्य में आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है। भारत हर साल बाढ़, चक्रवात, भारी बारिश, बिजली गिरने, लू और तेज आंधी जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। इन आपदाओं की वजह से कई राज्यों में जान-माल का भारी नुकसान होता है। कई बार अचानक मौसम बदलने से प्रशासन को तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में नई AI तकनीक स्थानीय स्तर पर पहले से सटीक चेतावनी जारी करने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सही जानकारी मिलने से आपदा से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

लोगों को समय पर मिलेगा अलर्ट

नई AI तकनीक की मदद से लोगों को समय रहते मौसम संबंधी अलर्ट जारी किए जा सकेंगे। यदि किसी इलाके में भारी बारिश, तेज आंधी, बिजली गिरने या बाढ़ जैसी स्थिति बनने की संभावना होगी, तो वहां पहले से चेतावनी भेजी जा सकेगी। इससे लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकेंगे और आवश्यक तैयारी कर पाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर अलर्ट मिलने से घबराहट और अफरा-तफरी की स्थिति भी कम होगी।

राहत और बचाव कार्य होंगे तेज

AI आधारित मौसम प्रणाली प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को तेजी से निर्णय लेने में मदद करेगी। पहले से सटीक जानकारी मिलने पर राहत और बचाव दलों को समय रहते सक्रिय किया जा सकेगा। बाढ़ या चक्रवात प्रभावित इलाकों में पहले से जरूरी संसाधन पहुंचाए जा सकेंगे। इससे आपदा के दौरान लोगों को जल्दी मदद मिल सकेगी और राहत कार्यों में तेजी आएगी। जान-माल के नुकसान को किया जा सकेगा कम विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की सटीक और समय पर जानकारी मिलने से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। यदि प्रशासन को पहले से जानकारी होगी कि किस इलाके में ज्यादा खतरा है, तो वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकेगा। इससे जान-माल की सुरक्षा बेहतर होगी और बड़े हादसों को रोका जा सकेगा।

संवेदनशील इलाकों को पहले से कराया जा सकेगा खाली

नई तकनीक की मदद से प्रशासन को यह पता चल सकेगा कि कौन-से इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। बाढ़, तूफान या भारी बारिश की स्थिति में उन क्षेत्रों को पहले से खाली कराया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा खासकर तटीय इलाकों और नदी किनारे बसे क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। स्कूल और यातायात सेवाओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा AI आधारित मौसम प्रणाली की मदद से प्रशासन स्कूलों, कॉलेजों और यातायात सेवाओं को भी समय रहते नियंत्रित कर सकेगा। यदि किसी इलाके में खराब मौसम की संभावना होगी, तो वहां स्कूल बंद करने, ट्रैफिक डायवर्ट करने या ट्रेन और बस सेवाओं को नियंत्रित करने जैसे फैसले पहले से लिए जा सकेंगे। इससे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिले

कैसे काम करेगा नया AI सिस्टम

विशेषज्ञों के अनुसार यह AI आधारित मौसम प्रणाली कई आधुनिक तकनीकों और डेटा स्रोतों का उपयोग करेगी। यह सिस्टम मौसम से जुड़ी लाखों जानकारियों का विश्लेषण कर बेहद कम समय में सटीक पूर्वानुमान तैयार करेगा। AI तकनीक मौसम के बदलते पैटर्न को समझने और स्थानीय स्तर पर भविष्यवाणी करने में सक्षम होगी। यही वजह है कि इसे मौसम विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है।

सैटेलाइट और रडार डेटा का होगा उपयोग

नई AI प्रणाली सैटेलाइट डेटा, मौसम रडार, तापमान, हवा की गति और पुराने मौसम रिकॉर्ड जैसी जानकारियों का उपयोग करेगी। इसके अलावा स्थानीय मौसम केंद्रों से मिलने वाले डेटा को भी इसमें शामिल किया जाएगा। AI तकनीक इन सभी जानकारियों को तेजी से प्रोसेस कर सटीक परिणाम तैयार करेगी। समय के साथ और ज्यादा सटीक होगा सिस्टम विशेषज्ञों का कहना है कि AI सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह समय के साथ खुद सीखता भी रहता है। यानी जितना ज्यादा डेटा सिस्टम को मिलेगा, उसकी भविष्यवाणी उतनी ही ज्यादा सटीक होती जाएगी। इससे आने वाले समय में मौसम पूर्वानुमान पहले से कहीं ज्यादा भरोसेमंद बन सकता है।

मौसम विज्ञान में भारत की बड़ी उपलब्धि

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय मौसम विभाग लगातार अपनी तकनीक को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है। देशभर में नए मौसम रडार लगाए गए हैं, सैटेलाइट निगरानी मजबूत की गई है और मोबाइल अलर्ट सिस्टम को भी बेहतर बनाया गया है। डिजिटल मौसम चेतावनी सेवाओं के जरिए अब लोगों तक तेजी से जानकारी पहुंचाई जा रही है। ऐसे में AI तकनीक को मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में शामिल करना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है भारत, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत मौसम पूर्वानुमान तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है। AI आधारित मौसम प्रणाली न केवल किसानों और आम लोगों को फायदा पहुंचाएगी, बल्कि यह आपदा प्रबंधन, जलवायु अध्ययन और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।

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