सरकारें केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावे और प्रचार करती हैं, लेकिन कई बार इन योजनाओं की जमीनी हकीकत अलग तस्वीर पेश करती है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सामने आया यह मामला एक बार फिर इन दावों और वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को उजागर करता है।
सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के कुनिया गांव की रहने वाली एक बहू ने अपनी वृद्ध सास को पीठ पर उठाकर लगभग 9 लोमीटर तक पैदल यात्रा की। बताया जा रहा है कि यह यात्रा उन्हें 1500 रुपये की मासिक पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं या राशि प्राप्त करने के लिए करनी पड़ी। भीषण गर्मी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किया गया यह सफर ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को भी दर्शाता है।
मैनपाट के कुनिया गांव से सामने आया दर्दनाक मामला
सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के कुनिया गांव की रहने वाली एक बहू ने अपनी वृद्ध सास को पीठ पर उठाकर लगभग 9 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। बताया जा रहा है कि यह यात्रा उन्हें 1500 रुपये की मासिक पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं या राशि प्राप्त करने के लिए करनी पड़ी।भीषण गर्मी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किया गया यह सफर ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को भी दर्शाता है। सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के कुनिया गांव की रहने वाली एक बहू ने अपनी वृद्ध सास को पीठ पर उठाकर लगभग 9 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। बताया जा रहा है कि यह यात्रा उन्हें 1500 रुपये की सिक पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं या राशि प्राप्त करने के लिए करनी पड़ी।भीषण गर्मी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किया गया यह सफर ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को भी दर्शाता है।मैनपाट के कुनिया गांव से सामने आया दर्दनाक मामला
सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के कुनिया गांव की रहने वाली एक बहू ने अपनी वृद्ध सास को पीठ पर उठाकर लगभग 9 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। बताया जा रहा है कि यह यात्रा उन्हें 1500 रुपये की मासिक पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं या राशि प्राप्त करने के लिए करनी पड़ी।भीषण गर्मी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किया गया यह सफर ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को भी दर्शाता है।
