महासमुंद में गर्मी बढ़ते ही देसी मटकों की मांग तेज हो गई है। बाजार में नल वाले और डिजाइनर मटकों की नई वैरायटी लोगों को आकर्षित कर रही है। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद बिक्री बढ़ने से कुम्हारों को फायदा हो रहा है।
महासमुंद में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। इसके चलते शहर में ठंडे पानी की खपत भी बढ़ गई है और लोग अब फ्रिज के पानी की जगह पारंपरिक मिट्टी के मटकों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।शहर के कचहरी चौक और नेहरू चौक जैसे प्रमुख बाजारों में इन दिनों मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर भीड़ देखने को मिल रही है। कुम्हारों ने इस बार मटकों की कई नई वैरायटी पेश की हैं, जिनमें नल वाले मटके सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन मटकों की खासियत यह है कि इनमें पानी निकालने के लिए बार-बार हाथ डालने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे पानी स्वच्छ बना रहता है और उपयोग भी आसान हो जाता है।
बाजार में तरह तरह के मटके
इसके अलावा बाजार में सजावटी और कलात्मक मटकों की भी अच्छी मांग है। इनमें रंग-बिरंगी पेंटिंग, नक्काशी और आकर्षक डिजाइन शामिल हैं, जो न केवल पानी को ठंडा रखते हैं बल्कि घर की सजावट में भी उपयोग किए जा रहे हैं। लोग अब इन मटकों को एक उपयोगी वस्तु के साथ-साथ सजावटी सामान के रूप में भी देख रहे हैं।
सेहत के प्रति जागरूकता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का कहना है कि मिट्टी के मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और यह शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी माना जाता है। यह गर्मी और लू से बचाने में मदद करता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है।
महंगाई का असर, बरकरार
कीमतों की बात करें तो इस साल मटकों के दामों में 10% से 20% तक की वृद्धि देखी गई है। इसके बावजूद बाजार में मांग कम नहीं हुई है। साधारण मटके 80 से 150 रुपये में बिक रहे हैं, जबकि नल वाले और डिजाइनर मटके 250 से 500 रुपये तक पहुंच गए हैं।
मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के लिए यह सीजन काफी अच्छा साबित हो रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ उनकी बिक्री में तेजी आई है और उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। पारंपरिक शिल्प को भी इससे नई पहचान मिल रही है और लोग फिर से मिट्टी के बर्तनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
