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बाघ की खाल के साथ गिरफ्तार आरोपी
बाघ की खाल के साथ गिरफ्तार आरोपी
जगदलपुर (बस्तर)

बाघों के शिकारी बेनकाब : दो बाघों की खाल के साथ पुलिसकर्मी समेत दो गिरफ्तार

मध्य भारत के संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर में वन विभाग ने अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में एक आरोपी के घर से पेंगोलिन के शल्क भी बरामद हुए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि गिरोह कई दुर्लभ वन्यजीवों की तस्करी में शामिल था और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Jul 2026, 10:26 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 03:58 AM
जगदलपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
मध्य भारत के संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर में सक्रिय एक अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का वन विभाग ने पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान दो बाघों की खाल के साथ गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी शुरुआती जांच में पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी पाए गए हैं। 
वहीं, एक आरोपी के घर से पेंगोलिन के शल्क मिलने के बाद जांच एजेंसियों को आशंका है कि गिरोह केवल बाघों के शिकार तक सीमित नहीं था, बल्कि कई दुर्लभ वन्यजीवों की अवैध तस्करी में भी शामिल हो सकता है। संयुक्त अभियान में हुई बड़ी कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम ने "ऑपरेशन सेफ पैसेज" के तहत यह कार्रवाई की।

संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपी गिरफ्तार

अभियान में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी), राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल और गरियाबंद पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही। महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से दो बाघों की खाल और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अहेरी स्थित बिजेश्वर गेडाम के घर पर छापा मारा गया, जहां से बड़ी मात्रा में पेंगोलिन के शल्क भी जब्त किए गए। मामला प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि जब्त की गई दोनों बाघों की खाल संभवतः इंद्रावती टाइगर रिजर्व और अबूझमाड़ क्षेत्र में शिकार किए गए बाघों की हो सकती हैं। इस मामले में पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र में वन अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

वन अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मध्य भारत में फैले बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। अब जांच एजेंसियां गिरोह के अन्य सदस्यों, तस्करी के रास्तों और संभावित खरीदारों की भी तलाश कर रही हैं। देश के महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर पर खतरा गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी और ओडिशा के सुनाबेड़ा तक फैला लगभग 400 किलोमीटर लंबा वन्यजीव गलियारा देश के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर में गिना जाता है।
महाराष्ट्र से निकलने वाले बाघ इसी मार्ग से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों तक पहुंचते हैं। इसी कॉरिडोर का उपयोग हाथी, गौर, जंगली भैंसा सहित कई दुर्लभ वन्यजीव भी करते हैं। ऐसे में यहां सक्रिय शिकारी और तस्कर वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

लगातार कार्रवाई से शिकारी गिरोहों पर बढ़ा दबाव

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम इससे पहले भी वर्ष 2023 में दो अलग-अलग अभियानों में दो बाघों की खाल बरामद कर अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का खुलासा कर चुकी है। इसके अलावा अप्रैल 2026 में अबूझमाड़ क्षेत्र में नौ विशाल भारतीय गिलहरियों के शिकार के मामले में भी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। वन विभाग का कहना है कि लगातार चल रही कार्रवाई के कारण शिकारी गिरोहों पर दबाव बढ़ा है और टाइगर कॉरिडोर में बाघों की सुरक्षित आवाजाही को भी मजबूती मिली है।
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