बंगाल की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। बांग्लादेश के बरगुना जिले के पत्थरघाटा तट के पास समुद्र में बहता हुआ अमेरिकी नौसेना का एक ऑटोनॉमस अंडरवॉटर ग्लाइडिंग व्हीकल (AUV) मिलने के बाद सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर यह अत्याधुनिक उपकरण इस क्षेत्र में क्या कर रहा था और इसका वास्तविक उद्देश्य क्या था। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 31 मई को स्थानीय मछुआरों को समुद्र में एक अज्ञात उपकरण दिखाई दिया। बाद में जांच में पता चला कि यह अमेरिकी नौसेना द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल है, जो समुद्र के भीतर लंबे समय तक बिना मानव नियंत्रण के संचालित हो सकता है।
ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल
ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल एक मानव रहित समुद्री उपकरण होता है, जिसे समुद्र की गहराइयों में डेटा एकत्र करने के लिए डिजाइन किया जाता है। यह समुद्र के तापमान,लवणता,जलधाराओं,समुद्री तल की संरचना और अन्य पर्यावरणीय जानकारियों को रिकॉर्ड कर सकता है आधुनिक नौसेनाएं इन उपकरणों का उपयोग समुद्री अनुसंधान,पनडुब्बी संचालन,समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी जैसे कार्यों के लिए करती हैं अमेरिकी नौसेना पिछले दो दशकों से ऐसे ग्लाइडर आधारित सिस्टम का व्यापक उपयोग कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कुछ वर्ष पहले तक अमेरिकी नौसेना दुनिया भर में 200 से अधिक ऐसे ग्लाइडर संचालित कर चुकी थी और अब इनकी संख्या इससे कहीं अधिक होने की संभावना है।
बरगुना तट पर पहुंचा ग्लाइडर
मिली जानकारी के अनुसार यह लगभग आठ फीट लंबा अंडरवॉटर ग्लाइडर समुद्री धाराओं के साथ बहता हुआ बांग्लादेश के तटीय क्षेत्र तक पहुंच गया इसमें एक इंटरनल कंट्रोल मॉड्यूल,ऑपरेटिंग सिस्टम,सेंसर और डेटा स्टोरेज यूनिट मौजूद थी। बांग्लादेश नौसेना ने इसके भीतर मौजूद सीरियल नंबर, बारकोड और अन्य तकनीकी विवरणों को सुरक्षित कर लिया है अधिकारियों का कहना है कि उपकरण की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह किस मिशन पर था और इसमें किस प्रकार का डेटा संग्रहित है।
बंगाल की खाड़ी की निगरानी
यही सबसे बड़ा सवाल है जिसने पूरे घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना दिया है।ऐसे उपकरणों का उपयोग केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित नहीं होता समुद्री पर्यावरण से जुड़ी जानकारी आधुनिक नौसैनिक अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है समुद्र की गहराई, तापमान,ध्वनि संचरण और जलधाराओं का डेटा पनडुब्बियों की गतिविधियों, नौसैनिक रणनीतियों और समुद्री निगरानी में उपयोगी है अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि यह ग्लाइडर जासूसी मिशन पर था। लेकिन इसकी मौजूदगी ने क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का ध्यान जरूर आकर्षित किया है।
अमेरिका-बांग्लादेश सैन्य शक्ति
इस घटना के कुछ दिनों बाद 7 जून को ढाका में अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और बांग्लादेश नौसेना प्रमुख के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमे अमेरिकी रक्षा अताशे लेफ्टिनेंट कर्नल माइकल आर. चैंडलर और मरीन अताशे मेजर कारस्टेन ई. फ्लेचर ने बांग्लादेश नौसेना प्रमुख एडमिरल मोहम्मद नजमुल हसन से मुलाकात की दोनों पक्षों ने बैठक के एजेंडे का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि बरामद किए गए AUV का मुद्दा बैठक में उठाया गया या नहीं।
बंगाल की खाड़ी
बंगाल की खाड़ी आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में गिनी जाती है। यह क्षेत्र भारत,बांग्लादेश,म्यांमार,श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री संपर्क का प्रमुख मार्ग है इसके अलावा यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और नौसैनिक गतिविधियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है भारत, अमेरिका, चीन और अन्य कई देश इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि यहां किसी भी सैन्य या निगरानी गतिविधि को गंभीरता से देखा जाता है।
भारत
बंगाल की खाड़ी में किसी भी विदेशी निगरानी प्रणाली की मौजूदगी भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी रुचि का विषय हो सकती है भारत पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत कर रहा है। ऐसे में क्षेत्र में सक्रिय किसी भी उन्नत निगरानी प्रणाली की गतिविधियां सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं फिलहाल इस मामले में भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
