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राफेल ने गिराया दुश्मन का ड्रोन
राफेल ने गिराया दुश्मन का ड्रोन
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राफेल ने रचा इतिहास : नाटो एयरस्पेस में मार गिराया दुश्मन का ड्रोन, भारत के लिए क्यों है यह गेम-चेंजर?

लातविया के हवाई क्षेत्र में नाटो के एयर पुलिसिंग मिशन पर तैनात एक फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान ने घुसपैठ करने वाले एक ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। इस घटना को आधुनिक हवाई युद्ध में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि ड्रोन ऐसे क्षेत्र में उड़ रहा था जहां भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर गतिविधियां चल रही थीं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 09 Jun 2026, 10:12 AM · अपडेट: 22 Oct 2026, 08:32 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

यूरोप के आसमान से एक ऐसी सैन्य खबर आई है जिसने वैश्विक रक्षा (ड्रोन) विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय वायुसेना (IAF) को भी जोश से भर दिया है। लातविया के हवाई क्षेत्र (Airspace) में नाटो (NATO) के 'एयर पुलिसिंग मिशन' पर तैनात एक फ्रांसीसी राफेल (Rafale) लड़ाकू विमान ने रूसी सीमाओं से आए एक मानवरहित हवाई वाहन (UAV/ड्रोन) को सफलतापूर्वक मार गिराया है।

यह कोई सामान्य इंटरसेप्शन नहीं था, बल्कि आधुनिक हवाई युद्ध के इतिहास का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसने राफेल की अचूक मारक क्षमता और उसके इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का लोहा मनवा दिया है।

इस पूरे ऑपरेशन को नाटो के रैपिड रिएक्शन एयर मिशन के तहत अंजाम दिया गया। यह इतिहास में पहली बार है जब लातविया के ऊपर किसी भटकते हुए विदेशी ड्रोन को फाइटर जेट ने हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया।

इस मिशन की दो सबसे बड़ी चुनौतियां थीं, जिन्हें राफेल ने पलक झपकते ही ध्वस्त कर दिया:

  1. इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स को छकाया: यह ड्रोन उस क्षेत्र में उड़ रहा था जहां रूस की तरफ से भारी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) और जीपीएस जैमिंग की जा रही थी। राफेल ने रूस के इस अदृश्य चक्रव्यूह को भेदकर ड्रोन का शिकार किया।

  2. छोटे और छिपे हुए टारगेट का खात्मा: मिलिट्री ड्रोन आकार में बेहद छोटे होते हैं और बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं। इन्हें पारंपरिक रडार से पकड़ना लगभग असंभव माना जाता है, लेकिन राफेल ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।

लातविया की विदेश मंत्री बैबा ब्रेज ने 'X' पर आभार जताते हुए कहा: > "लातविया के एयरस्पेस में घुस आए ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराने के लिए हमारे फ्रांसीसी सहयोगियों का सहहृदय धन्यवाद! नाटो की एकजुटता और मुस्तैदी का यह एक बड़ा प्रमाण है।"

कैसे हुआ यह 'हवाई शिकार'? 

लिथुआनियाई सेना के प्रवक्ता गिंटाउटस सिउनिस ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उत्तरी लिथुआनिया के सियाउलियाई एयरबेस से दो फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों ने आपातकालीन उड़ान भरी। स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10:00 बजे इन विमानों ने लातवियाई एयरस्पेस में घुसपैठ करने वाले रूसी ड्रोन को इंटरसेप्ट किया और मार गिराया।

लातवियाई सेना की प्रारंभिक जांच के अनुसार, यूक्रेन युद्ध के चलते इस पूरे क्षेत्र में भीषण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर चल रहा है। इसी रूसी जैमिंग के कारण यह ड्रोन अपना रास्ता भटककर नाटो देश की सीमा में घुस आया था।

राफेल की वो गुप्त तकनीक, जिसने रूस को चौंकाया

इस मिशन की सफलता के पीछे राफेल की दो सबसे एडवांस तकनीकें शामिल थीं:

  • RBE2 AESA रडार: यह 'एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे' रडार बेहद कम 'रेडार क्रॉस-सेक्शन' (RCS) वाले छोटे ड्रोनों को भी बहुत दूर से ट्रैक कर लेता है, चाहे वे जमीन के कितने ही करीब क्यों न उड़ रहे हों।

  • स्पेक्ट्रा (SPECTRA) EW सुइट: राफेल का यह इन-बिल्ट इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दुश्मन के किसी भी भारी जैमिंग सिग्नल को न सिर्फ बेअसर करता है, बल्कि पायलट को सुरक्षित कॉम्बैट एनवायरनमेंट देता है।

भारत के लिए यह खबर लॉटरी लगने जैसी क्यों है?

भारतीय वायुसेना (IAF) वर्तमान में राफेल विमानों के दो स्क्वाड्रन ऑपरेट करती है। फ्रांस के बाद भारत राफेल का सबसे प्रमुख यूजर है। लातविया की इस घटना ने भारतीय रक्षा रणनीतिकारों को दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर बहुत बड़ी सुरक्षा गारंटी दे दी है:

1. पाकिस्तान की 'ड्रोन टेररिज्म' नीति पर फुलस्टॉप

पाकिस्तान की तरफ से पंजाब और जम्मू-कश्मीर सीमाओं पर हथियारों, ड्रग्स और जासूसी के लिए छोटे और मध्यम आकार के ड्रोनों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। राफेल की यह सफलता साबित करती है कि भारतीय राफेल भी सीमा पार से आने वाले इन 'साइलेंट किलर' ड्रोनों को हवा में ही भस्म करने में सक्षम हैं, खासकर तब जब किसी हाई-वैल्यू टारगेट की सुरक्षा करनी हो।

2. LAC पर चीनी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का तोड़

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना (PLA) ने बड़े पैमाने पर एडवांस रडार और इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स तैनात कर रखे हैं, ताकि भारतीय विमानों के कम्यूनिकेशन को ठप किया जा सके। लातविया में राफेल ने जिस तरह रूसी जैमिंग के बीच काम किया, उससे साफ है कि लद्दाख या तवांग के आसमान में चीनी सेना की इलेक्ट्रॉनिक दादागिरी राफेल के सामने फेल हो जाएगी। भीषण युद्ध की स्थिति में भी भारतीय राफेल गंभीर इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं को चीरते हुए दुश्मन के ड्रोन और विमानों को ढूंढकर मार गिराने के लिए तैयार हैं।

निष्कर्ष: लातविया की इस घटना ने साबित कर दिया है कि राफेल सिर्फ पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स से मुकाबला करने के लिए ही नहीं, बल्कि आज के दौर के सबसे बड़े खतरे— यानी 'ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर'— से निपटने के लिए भी दुनिया का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान है। भारत का राफेल पर दांव लगाना पूरी तरह सही साबित हुआ है।

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