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Panic among villagers due to rising tiger attacks (Image source: Social media)
Panic among villagers due to rising tiger attacks (Image source: Social media)
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Balaghat Tiger Attack: 6 महीनों में 6 मौतों से दहला कान्हा बफर जोन, विधायक ने सीएम के सामने उठाई सुरक्षा की मांग

Balaghat Tiger Attack: कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे गांवों में बाघों की बढ़ती आवाजाही से मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर हो गया है। बीते छह महीनों में बाघों के हमलों में 6 लोगों की मौत और 2 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। अगस्त में कई हमलों के बाद ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। बफर जोन से करीब 21 गांव जुड़े हैं, जहां लगभग 28 बाघों की मौजूदगी बताई गई है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 01 Sep 2026, 09:03 AM · अपडेट: 06 Oct 2026, 10:01 PM
बालाघाट
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Balaghat Tiger Attack: मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सन्नाटा और खौफ का माहौल है। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से सटे गांवों में बाघों की आवाजाही अचानक इतनी बढ़ गई है कि लोग अपने ही घरों और खेतों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीते छह महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंसानों और बाघों के बीच का यह आमना-सामना अब बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है। इस अवधि में बाघ के हमलों में 6 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अगस्त का महीना इलाके के ग्रामीणों के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा, जब एक के बाद एक हमले की कई घटनाएं सामने आईं। 

अगस्त के महीने में तेज हुआ टकराव

  • 2 अगस्त: कान्हा बफर क्षेत्र के पर्रापुर गांव में देर रात एक बाघ घर में घुस आया और एक महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।
  • 7 अगस्त: मालखेड़ी क्षेत्र में खेत पर काम कर रहे एक युवा किसान राजकुमार परते पर बाघ ने जानलेवा हमला कर दिया।

  • 9 अगस्त: खैरलांजी परिक्षेत्र के पांडरवानी-सतीटोला में बाघ ने हमला कर एक किसान और उसकी तीन मवेशियों को मार डाला।

  • 18 अगस्त: कान्हा के बफरजोन से लगे ग्राम करेली के रहने वाले संतोष मेश्राम पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

    ग्रामीणों में दहशत
    21 गांव और 28 बाघों की मौजूदगी 

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कान्हा नेशनल पार्क के बफर जोन की सीमा से लगभग 21 गांव सीधे सटे हुए हैं। इस पूरे इलाके में करीब 28 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है। जंगलों में बाघों के प्राकृतिक शिकार और पानी की कमी के कारण वे अक्सर भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों का रुख कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण लगातार खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। 

विधायक ने उठाया सुरक्षा का मुद्दा

क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालातों और ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए स्थानीय कांग्रेस विधायक मधु भगत ने बालाघाट दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात की। विधायक ने सीएम के सामने बफर जोन के गांवों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और एक मजबूत दीर्घकालिक नीति बनाने की मांग की। उन्होंने प्रशासन को सुझाव देते हुए कहा कि केवल मुआवजा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि धरातल पर कड़े कदम उठाने होंगे।
  1. सुरक्षा बाड़ और लाइट: प्रभावित गांवों की सीमाओं पर मजबूत फेंसिंग (बाड़) लगाई जाए और रात के समय पर्याप्त रोशनी (सोलर/स्ट्रीट लाइट) की व्यवस्था हो।

  2. रियल-टाइम ट्रैकिंग: वन विभाग की टीमें बाघों की लोकेशन पर 24 घंटे नजर रखें और गांव वालों को रियल-टाइम अलर्ट भेजें।

  3. गश्त और प्रशिक्षण: जंगल से सटे इलाकों में पुलिस और वन कर्मियों की पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, साथ ही ग्रामीणों को बचावात्मक प्रशिक्षण दिया जाए।

  4. जंगल के भीतर इंतजाम: बाघों को आबादी की तरफ आने से रोकने के लिए जंगल के अंदर ही उनके लिए पर्याप्त पानी और शिकार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते इस संघर्ष को थामने के लिए अब केवल कागजी दावों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जिम्मेदार प्रशासन और ठोस रणनीति की सख्त जरूरत है।

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