गंदगी और बुराई के अंत का संदेश
पीतमपुरा दशहरा कमेटी के अध्यक्ष और स्थानीय बीजेपी विधायक अशोक गोयल ने इस आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम 'स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली' अभियान को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
"कॉकरोच गंदगी, बीमारियों और अस्वच्छता का प्रतीक है। जिस तरह रावण का दहन करके हम बुराई के अंत का संदेश देते हैं, उसी तरह कॉकरोच का पुतला जलाकर लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई रखने और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।"
— अशोक गोयल, अध्यक्ष, पीतमपुरा दशहरा कमेटी
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पहल के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि रामलीला मंचन के दौरान इस कॉकरोच को रावण की सेना के असुरों के रूप में दिखाया जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में 'कॉकरोच' नाम की चर्चा तेज़
रामलीला मैदान में 30 फीट के कॉकरोच की खबर सामने आते ही दिल्ली के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। दरअसल, इन दिनों राजधानी में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम का एक युवा संगठन काफी सुर्खियों में है। यह संगठन बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और सरकार की जवाबदेही जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहा है। हाल के दिनों में इस संगठन ने दिल्ली में वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी कई विरोध प्रदर्शन किए हैं।16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में बड़े प्रदर्शन की तैयारी
इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देशवासियों से 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर जुटने की अपील की है। संगठन ने दिल्ली से बाहर रहने वाले लोगों से भी अपने-अपने शहरों में 'तिरंगा मार्च' निकालने का आह्वान किया है।
क्या रामलीला का कॉकरोच खींचेगा सबका ध्यान?
एक तरफ जहां आयोजक इस कॉकरोच दहन को शुद्ध रूप से सामाजिक और स्वच्छता जागरूकता का जरिया बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में 'कॉकरोच' शब्द पहले से ही एक चर्चित राजनीतिक विरोध का प्रतीक बन चुका है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि रामलीला के मंच पर रावण के साथ जलने वाला यह 30 फीट का कॉकरोच आम जनता और दर्शकों का कितना ध्यान आकर्षित कर पाता है।







