CJP Protest: दिल्ली के व्यस्त इलाके कनॉट प्लेस में आयोजित होने वाले 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से ठीक पहले पुलिस की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम पहले हिरासत में लिया और बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, दूसरी ओर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने पकड़ा था, हालांकि कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। महज आठ दिनों के भीतर अभिजीत दिपके पर पुलिस का यह दूसरा बड़ा एक्शन है। इससे पहले बीते 10 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर एक फ्लाइट से उतरते ही हिरासत में लिया गया था, हालांकि अगले ही दिन वे रिहा कर दिए गए थे।
शांति भंग होने का अंदेशा, पुलिस की सख्त धाराएं
दिल्ली पुलिस ने इस बार दिपके पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की है। यह धाराएं आमतौर पर इलाके में शांति-व्यवस्था बिगड़ने या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका में लगाई जाती हैं। अधिकारियों के मुताबिक दिपके को अब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पुलिस ने घर पहुंचकर थमाया था नोटिस
बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से पहले दिल्ली पुलिस की एक टीम झंडेवालान स्थित दिपके के आवास पर पहुंची थी और उन्हें बाकायदा नोटिस थमाया था। पुलिस का तर्क था कि कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के आसपास धाराएं लागू हैं और इस मार्च के लिए सक्षम प्राधिकारियों से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई है। बिना परमिशन इतने बड़े प्रदर्शन से आम लोगों, राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था। हालांकि, पुलिस चेतावनी के बावजूद CJP कार्यकर्ता और नेता अपनी मांग पर अड़े रहे। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि दिपके को उठाने के बाद काफी समय तक उनकी मौजूदगी की जगह सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे उनके वकीलों को मिलने में काफी परेशानी झेलनी पड़ी।नेहा बोरा की हिरासत और रिहाई पर क्या बोलीं AISA अध्यक्ष?
घटनाक्रम में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को शुक्रवार शाम मंडी हाउस के पास से उस वक्त हिरासत में लिया गया, जब वे मार्च में शामिल होने जा रही थीं। लगभग कई घंटों के सस्पेंस के बाद दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें देर रात छोड़ दिया गया। रिहा होने के तुरंत बाद नेहा बोरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि "सत्ता में बैठे लोगों को अपना अहंकार छोड़कर जनता की आवाज सुननी चाहिए।"
क्यों हो रहा है 'लहरा दो तिरंगा' मार्च?
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उनके सहयोगी संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की आड़ में वास्तविक आम नागरिकों और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं। इसी मांग को लेकर वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़े हैं और बीते एक महीने से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन दर्ज करा रहे हैं।







