Lake dispute : ट्रंप ने लेक ओंटारियो का नाम बदला, कनाडा ने जताया कड़ा ऐतराज
Lake dispute: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 400 साल से भी अधिक पुरानी इस झील का नाम हमेशा लेक ओंटारियो ही रहेगा।
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कीर्तिमान डेस्क | कमलेश साहू
30 Aug 2026, 07:50 PM
अमेरिका
Lake dispute:अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापारिक खींचतान अब कूटनीतिक और भौगोलिक विवाद का रूप लेती दिख रही है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई व्यापार वार्ता बेनतीजा खत्म होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादित कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस आदेश के तहत अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध 'लेक ओंटारियो' का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने का फैसला लिया गया है।
नाम बदलने के फैसले पर क्या बोले कार्नी और ट्रंप ?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका के भीतर भौगोलिक स्थानों के आधिकारिक नाम तय करने का उनके पास व्यापक अधिकार है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक दूसरे देशों के लिए इस तरह के एकतरफा बदलाव को मानना अनिवार्य नहीं होता। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस कदम को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, चीजें जिस नाम से जानी जाती हैं, उन्हें उसी नाम से पुकारा जाना चाहिए। इस झील का नाम लेक ओंटारियो है—आज भी और हमेशा रहेगा। कार्नी ने याद दिलाया कि लेक ओंटारियो नाम का इतिहास 400 साल से भी ज्यादा पुराना है, जो कनाडा के गठन और खुद अमेरिका की आजादी से पहले का है।
30 दिनों में अमेरिकी नक्शों पर बदलेगा नाम
Despute with mexico
राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश के तहत अमेरिकी गृह विभाग को 'ज्योग्राफिक नेम्स इंफॉर्मेशन सर्विस' (GNIS) के रिकॉर्ड में 30 दिनों के भीतर नया नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिका में घरेलू स्तर पर भौगोलिक नामों का आधिकारिक रिकॉर्ड यही विभाग संभालता है। कनाडा के अन्य प्रमुख नेताओं और प्रांतों के प्रमुखों ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड सहित कई मंत्रियों ने साफ किया कि कनाडाई नागरिकों और बाकी दुनिया के लिए यह झील हमेशा 'लेक ओंटारियो' ही रहेगी।
पहले मेक्सिको के साथ भी हो चुका है ऐसा ही विवाद
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी साझा जल क्षेत्र का नाम बदलने का फैसला किया हो। 2025 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद उन्होंने मेक्सिको की खाड़ी (Gulf of Mexico) का नाम बदलकर गल्फ ऑफ अमेरिका कर दिया था। मेक्सिको ने इस फैसले को मानने से साफ इनकार करते हुए कहा था कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय या साझा जल क्षेत्र पर एकतरफा अधिकार नहीं जता सकता। उस दौरान टेक कंपनी गूगल के साथ भी कानूनी अड़चनें सामने आई थीं।
खुद अमेरिका के भीतर भी उठने लगीं विरोध की आवाजें
ट्रंप के इस फैसले पर अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक तरफ जहाँ गृह मंत्री डग बर्गम ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिकी सीमाओं से जुड़े जल क्षेत्रों में देश की महानता झलकनी चाहिए, वहीं विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसकी सख्त आलोचना की है। मिशिगन से डेमोक्रेटिक सांसद डेबी डिंगेल ने ट्रंप के इस कदम को "गैर-जिम्मेदाराना" बताते हुए इसके खिलाफ अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में बिल लाने की बात कही है। वहीं, लेक ओंटारियो की सीमा से लगे इकलौते अमेरिकी राज्य न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका राज्य इस झील को 'लेक अमेरिका' के नाम से नहीं संबोधित करेगा।