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Rescue operation in hydropower tunnels (Image source: Keertiman Media)
Rescue operation in hydropower tunnels (Image source: Keertiman Media)
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Nepal Flood: तबाही के बीच जलविद्युत  सुरंगों में जिंदगी और मौत की जंग, रेस्क्यू में जुटीं अंतरराष्ट्रीय टीमें

Nepal Flood: भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में 933 से अधिक मजदूर और इंजीनियर फंसे बताए जा रहे हैं। सेना और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल राहत एवं रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 01 Sep 2026, 08:30 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 04:55 AM
नेपाल
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Nepal Flood: हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस आपदा में 900 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। तबाही के इस मंजर के बीच सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है देश की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स) की सुरंगों (टनल) में फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालना। अनुमान के मुताबिक, नेपाल के करीब 13 अलग-अलग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में 933 से ज्यादा मजदूर और इंजीनियर फंसे हुए हैं। 

सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना कठिन 

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन लगातार हो रही भारी बारिश और ढहे हुए मलबे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद कठिन हो गया है। सेना और बचाव दल अपर त्रिशूली-1, त्रिशूली-3A और त्रिशूली-3B जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुँचने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट का रास्ता साफ करने के लिए सोमवार तड़के रसुवा में पहाड़ियों पर कंट्रोल्ड ब्लास्ट (नियंत्रित विस्फोट) किया गया। 

लोगों को रेस्क्यू करते 
चीन और दक्षिण कोरिया की रेस्क्यू टीम भी पहुंची 

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के अनुसार, रविवार को त्रिशूली-3A की सुरंग में एक बड़ा सुराख बनाकर अंदर आवाजें दी गईं, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। वहीं बीबीसी नेपाली के मुताबिक, रसुवागढ़ी प्रोजेक्ट की सुरंग के भीतर सैनिकों ने ड्रोन भेजकर जांच की, मगर फिलहाल वहां किसी का सुराग नहीं मिल सका है। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीमें भी नेपाल पहुँच चुकी हैं। 
सेना से लोगों की उम्मीद 
नेपाल सरकार ने टनल रेस्क्यू और अज्ञात शवों की डीएनए पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मदद मांगी है। सुरंगों के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपर त्रिशूली-1 में तैनात इंजीनियर मिलन खरेल की बहन प्रिया खरेल का कहना है, "सुरंग से बाहर निकले लोगों ने बताया कि अंदर और भी लोग हैं। हमें उम्मीद है कि सेना जल्द उन तक पहुँचेगी।" 

समय बीतने पर परिजनों का टूटा धैर्य 

वहीं सीता पांडे, जिनके पति जिबलाल अधिकारी त्रिशूली-3A में फंसे हैं, कहती हैं कि सुरंग में ऑक्सीजन सिस्टम होने के कारण उन्हें 50% उम्मीद है कि उनके पति सुरक्षित होंगे। हालांकि, समय बीतने के साथ परिजनों का धैर्य टूट रहा है और वे रेस्क्यू ऑपरेशन की धीमी गति पर सवाल उठा रहे हैं।

रेस्क्यू के लिए सुरंग में जाते बवाच कर्मी 
खौफनाक मंजर से बच निकले प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती

इस आपदा से सुरक्षित बचे लोगों की कहानियाँ रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं:

  • पहाड़ियों की तरफ 12 घंटे का पैदल सफर: मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तकनीकी कर्मचारी शिवा गिरी ने बताया कि बाढ़ आते ही अपनी आँखों के सामने इमारतों को बहते देख वे पहाड़ी की ओर भागे। उनके कई साथी पानी के तेज बहाव में बह गए। लगभग 12 घंटे तक घने जंगलों और चट्टानों के बीच भटकने के बाद उन्होंने एक गुफा में रात बिताई और बाद में सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा काठमांडू के अस्पताल पहुँचाए गए।

  • मौत को मात देने वाली 35 मीटर की चढ़ाई: अपर त्रिशूली-1 के सिविल इंजीनियर संदीप राणा ने बताया कि सायरन बजते ही उन्हें पता चला कि 12 किमी ऊपर का बांध टूट चुका है। जान बचाने के लिए वे 100 कर्मचारियों के साथ गिरते पत्थरों के बीच से 35 मीटर ऊँची पहाड़ियों पर चढ़ गए और अपनी आँखों से पूरे परिसर को पानी में समाते देखा।

  • लोहे की सीढ़ी के सहारे 6 घंटे: रातोपाटी के अनुसार, एक अन्य जीवित बचे व्यक्ति रामचंद्र और उनके 5 साथियों ने सुरंग के अंदर पानी भरते देख छत पर लगी लोहे की सीढ़ी और टिन की चादर को कसकर पकड़ लिया। वे 6 घंटे तक पानी के बहाव के बीच सीढ़ी से लटके रहे और आखिरकार अपनी जान बचाने में कामयाब हुए।

कुदरत का कहर और आगे की चुनौती 

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, अब तक सुरंगों से 279 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लेकिन देश के उत्तरी इलाकों में आगामी दिनों में और भारी बारिश की चेतावनी ने राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रेस्क्यू टीमें अब भी हर बीतते सेकंड के साथ सुरंगों में जिंदगी की आस तलाश रही हैं।
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