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Development works in Bastar villages using DMF funds
Development works in Bastar villages using DMF funds
दंतेवाड़ा (दक्षिण बस्तर)

Bastar Development: DMF नियमों में ढील से दूर-दराज के गांवों तक पहुंचेगा बुनियादी ढांचा

केंद्र सरकार ने LWE प्रभावित क्षेत्रों में DMF राशि के इस्तेमाल के नियमों में बदलाव करते हुए 15-25 किमी की दूरी सीमा खत्म कर दी है। इससे बस्तर के दूरस्थ गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।

कीर्तिमान न्यूज
31 Aug 2026, 08:19 AM
दंतेवाड़ा
Bastar Development: लंबे समय से माओवादी हिंसा का संताप झेल रहे बस्तर संभाग में अब बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को एक नया आधार मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित इलाकों के लिए जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के उपयोग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस विशेष छूट के बाद खनिज बहुल जिलों से एकत्र होने वाला फंड अब बस्तर के उन बेहद दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में भी खर्च हो सकेगा, जो अब तक प्रशासनिक सीमाओं और कठोर नियमों के चलते विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे। पुराने प्रावधानों के तहत DMF राशि का इस्तेमाल केवल खनन प्रभावित क्षेत्र से 15 से 25 किलोमीटर की परिधि के भीतर ही करना अनिवार्य था। 

सुविधाएं पहुंचाने का मार्ग हुआ प्रशस्त 

इस भौगोलिक बाध्यता की वजह से सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के अंदरूनी इलाकों तक फंड नहीं पहुंच पाता था। केंद्र सरकार ने अब इस दूरी की सीमा को खत्म कर दिया है। यह विशेष ढील वित्तीय वर्ष 2027-28 तक प्रभावी रहेगी। इससे विशेष रूप से बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जैसे संवेदनशील जिलों के अंतिम छोर पर बसे गांवों में पक्की सड़कें, स्वच्छ पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। 

दंतेवाड़ा के खनिज फंड से संवरेंगे 4 जिले

छत्तीसगढ़ को खनिज संसाधनों से हर साल भारी राजस्व प्राप्त होता है। राज्य को अकेले कोरबा से लगभग 700 करोड़ रुपये और दंतेवाड़ा से करीब 600 करोड़ रुपये की DMF राशि मिलती है।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 का खनिज राजस्व: 16,738 करोड़ रुपये

  • अगले वित्तीय वर्ष का अनुमानित राजस्व: 19,000 करोड़ रुपये से अधिक

  • मुख्य चुनौती जन-विश्वास हासिल करना 

    भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल ने जानकारी दी कि नए दिशा-निर्देशों के तहत दंतेवाड़ा के कुल DMF फंड की 50 प्रतिशत राशि सीधे बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और कांकेर जिलों के बीच वितरित कर दी गई है, ताकि वहां बुनियादी निर्माण कार्यों में तेजी लाई जा सके। क्षेत्र में सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और नक्सली गतिविधियों में आई कमी के बाद अब मुख्य चुनौती अंदरूनी इलाकों में जन-विश्वास हासिल करने की है। 

    विधानसभा चुनावों से पहले पहुंचेगी सुविधाएं 

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा कैंप स्थापित कर देने से स्थिति पूरी तरह नहीं बदलेगी, जब तक ग्रामीणों तक मोबाइल नेटवर्क (4G/5G), पोर्टा केबिन स्कूल, अस्पताल और पक्की सड़कें नहीं पहुंचेंगी, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वर्ष 2028 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले बस्तर के प्रत्येक गांव तक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। DMF नियमों में मिली यह छूट इसी भावी रणनीति का एक अहम हिस्सा है। 
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