CG Paddy Shortage: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के भौतिक सत्यापन और लेखा मिलान में बड़ी कमी सामने आई है। प्रदेश के उपार्जन केंद्रों में करीब 68,491 टन धान कम पाया गया है। इस मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए विस्तृत जांच की मांग की है।
खरीदी प्रभारी या प्रबंधक से इसकी भरपाई कराई जा सकती है। संबंधित अधिकारियों को या तो कम पाए गए धान की कीमत जमा करनी होगी या उतनी मात्रा में धान उपलब्ध कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। धान की मात्रा कम होने के पीछे सूखत, लंबे समय तक भंडारण और रखरखाव के दौरान हुई बर्बादी को संभावित कारण बताया जा रहा है।
कांकेर में 13,436 टन धान दर्ज किया गया
जिलावार आंकड़ों के अनुसार कांकेर में सबसे अधिक 13,436 टन धान का अंतर दर्ज किया गया है। इसके बाद राजनांदगांव में 4,825 टन, बस्तर में 4,739 टन, गरियाबंद में 4,424 टन और बालोद में 4,248 टन धान की कमी सामने आई है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 3,906 टन, कबीरधाम में 3,838 टन और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 3,467 टन धान का अंतर दर्ज किया गया है।
खरीदी केंद्रों की व्यवस्था में सवाल खड़े हो रहे
हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में अंतर सामने आने के बाद खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और धान के सुरक्षित भंडारण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य में पिछले खरीफ सीजन के दौरान लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। प्रदेश के कुल 2,740 उपार्जन केंद्रों में से 2,634 केंद्रों का लेखा मिलान पूरा हो चुका है। शेष केंद्रों का हिसाब पूरा होने के बाद धान की कमी के अंतिम आंकड़ों में बदलाव भी हो सकता है।
इन जिलों में आंकड़ा अधिक
इन जिलों में कमी का आंकड़ा अधिक होने के कारण संबंधित समितियों और खरीदी केंद्रों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। अन्य जिलों में धान की कमी अपेक्षाकृत कम बताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 314 टन, बलौदाबाजार में 292 टन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 231 टन, बिलासपुर में 214 टन और रायपुर में 210 टन का अंतर सामने आया है।
उपार्जन केंद्रों में धान की कुल मात्रा 68,491 टन बताई
राज्यभर के उपार्जन केंद्रों में कम पाए गए धान की कुल मात्रा 68,491 टन बताई जा रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में सामने आया अधिकांश शॉर्टेज कुछ चुनिंदा जिलों में केंद्रित है। कांकेर में ही कुल कमी का बड़ा हिस्सा दर्ज हुआ है। दूसरी ओर, कई जिलों में यह अंतर कुछ सौ टन तक सीमित है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका दावा है कि सोसाइटियों में वास्तविक कमी बताए गए आंकड़ों से अधिक हो सकती है।
सक्ती, सूरजपुर और जांजगीर-चांपा की स्थिति
सक्ती जिले में 483 टन, सूरजपुर में 486 टन, जांजगीर-चांपा में 471 टन और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 566 टन धान की कमी दर्ज की गई है। वहीं सरगुजा जिले में यह आंकड़ा 1,151 टन बताया गया है। प्रदेश के 33 जिलों में से सात जिलों में धान का शॉर्टेज शून्य बताया गया है। शेष 26 जिलों में कुछ सौ टन से लेकर कई हजार टन तक का अंतर दर्ज हुआ है।
कांग्रेस ने की व्यापक जांच की मांग
उन्होंने इसे 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का मामला बताते हुए सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग की है। हालांकि, उनके आरोप राजनीतिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि धान की कमी सामान्य सूखत और भंडारण से जुड़ी है या इसके पीछे किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है।

