भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों के नाम सामने आने के बाद देश में नया सियासी विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर शहीदों के नाम एक साल तक छिपाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने इन जवानों की शहादत की जानकारी छिपाई और उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। इस पर रक्षा मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।
संसद को गुमराह करने का आरोप
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए पुराने भाषण का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने दावा किया कि रक्षा मंत्री ने संसद में कहा था कि इस अभियान में हमारे किसी जवान को नुकसान नहीं पहुंचा। पवन खेड़ा ने कहा कि या तो रक्षा मंत्री को अपने जवानों की शहादत का पता नहीं था या उन्होंने संसद में गलत जानकारी दी। दोनों ही बातें बहुत गंभीर हैं।
रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को नकारा
विवाद बढ़ता देख रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर स्थिति साफ की है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के भाषण के एक छोटे हिस्से को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने संसद में वायुसेना के विमानों और पायलटों के नुकसान की अफवाहों का खंडन किया था, न कि जवानों की शहादत को नकारा था। सरकार ने किसी भी शहीद का नाम नहीं छिपाया है।शहीदों को पहले ही मिल चुका है सम्मान
सरकार ने साफ किया कि शहीदों के नाम दर्ज करने की एक तय सरकारी प्रक्रिया होती है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक यानी वॉर मेमोरियल पर सभी नाम उसी नियम के तहत दर्ज किए गए हैं। इस साल 15 जनवरी को सेना दिवस पर खुद सेना प्रमुख ने तीन शहीदों के परिवारों को वीरता मेडल देकर सम्मानित किया था। शहीदों के परिवारों को पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य सभी सरकारी सुविधाएं पहले ही दी जा चुकी हैं।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर
भारतीय सेना ने पिछले साल 6 मई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बड़ी कार्रवाई की थी। सेना ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इस सटीक हमले में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। इस सफल अभियान के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बड़े अधिकारियों के बीच बातचीत हुई और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी थी।