देश की सुरक्षा को निशाना बनाने वाली एक और बड़ी पाकिस्तानी साजिश को केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने समय रहते नाकाम कर दिया है। पाकिस्तान से संचालित हो रहे आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लेते हुए एनआईए ने शुक्रवार को देश के चार राज्यों में एक साथ 12 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार मंगाकर भारत के प्रमुख शहरों को दहलाने की साजिश के इनपुट मिलने के बाद की गई है।
4 राज्यों में NIA का बड़ा सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा बलों और एनआईए की संयुक्त रणनीति के तहत शुक्रवार सुबह से ही चार राज्यों में संदिग्धों के ठिकानों को घेरना शुरू कर दिया गया। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, छापेमारी का दायरा इन राज्यों में फैला था:
उत्तर प्रदेश: सबसे अधिक 5 ठिकानों पर छापेमारी कर संदिग्धों के नेटवर्क को खंगाला गया।
महाराष्ट्र: मुंबई और आसपास के 3 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
राजस्थान व बिहार: दोनों राज्यों में 2-2 जगहों पर संदिग्धों के घरों और ठिकानों पर रेड की गई।
यह कार्रवाई उन स्थानीय गुर्गों और मददगारों को बेनकाब करने के लिए की गई है, जो सीमा पार बैठे हैंडलर्स के इशारे पर भारत में स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे हैं।
पाकिस्तानी एजेंट 'जसवीर चौधरी' का खतरनाक प्लान
जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरी साजिश के पीछे जसवीर चौधरी नाम का एक पाकिस्तानी ऑपरेटिव (एजेंट) है।
क्या था खतरनाक मंसूबा? जसवीर चौधरी ने भारत में सक्रिय अपने स्थानीय गुर्गों के साथ मिलकर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन (Drones) के जरिए भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और आईईडी (IEDs - इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की बड़ी खेप भारतीय सीमा में भिजवाई थी।
इन हथियारों और आईईडी का इस्तेमाल दिल्ली, पंजाब और देश के अन्य संवेदनशील हिस्सों में सिलसिलेवार बम धमाके करने के लिए किया जाना था। आतंकियों का मकसद बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान पहुंचाना और देश में दहशत का माहौल पैदा करना था। हालांकि, इससे पहले कि आरोपी अपनी इस खौफनाक साजिश को अंजाम दे पाते, एनआईए ने उनके नेटवर्क को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।
सिरसा थाना ग्रेनेड हमले में भी बड़ा खुलासा
आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एनआईए की यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। इससे ठीक तीन दिन पहले (मंगलवार को), एनआईए ने हरियाणा के सिरसा में नवंबर 2025 में हुए महिला पुलिस थाने पर ग्रेनेड हमले के मामले में भी अपनी जांच पूरी करते हुए 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
इस चार्जशीट से साफ हो गया है कि भारत में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए पाकिस्तान किस कदर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है।
केस से जुड़ी मुख्य बातें:
पाकिस्तानी हैंडलर शामिल: चार्जशीट में नामित आरोपियों में दो पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं, जिनमें पाकिस्तान में बैठा गैंगस्टर से आतंकी बना शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलूच मुख्य मास्टरमाइंड हैं।
सोशल मीडिया से ब्रेनवाश: जांच में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी हैंडलर्स ने भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड (सिक्योर) मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लालच देकर कट्टरपंथी बनाया और उन्हें इस मॉड्यूल में भर्ती किया।
मुख्य भारतीय एजेंट: भारत में इस पूरे मॉड्यूल का तालमेल संभालने वाले मुख्य एजेंट की पहचान धीरज के रूप में हुई है।
हमले का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजा था
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल ने बाकायदा रेकी करने के बाद 25 नवंबर 2025 को सिरसा के महिला पुलिस थाने को निशाना बनाया था और इसके लिए पंजाब से ग्रेनेड की व्यवस्था की गई थी।
हैरान करने वाली बात यह है कि दहशत फैलाने और अपनी कामयाबी का सबूत देने के लिए आरोपियों ने इस हमले का मोबाइल फोन पर वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में पाकिस्तान में बैठे आकाओं को भेजा गया और सोशल मीडिया पर वायरल करने की योजना थी। हमले के बाद भी ये आरोपी लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे।
लगातार कड़ा एक्शन जारी
एनआईए ने इन सभी आरोपियों पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल, इस साजिश के व्यापक नेटवर्क और फरार चल रहे अन्य सदस्यों का पता लगाने के लिए एनआईए की जांच और छापेमारी की कार्रवाई लगातार जारी है।
