मंदिरहसौद में करीब 74 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए नए तहसील भवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भवन के लोकार्पण से पहले ही दीवारों और निर्माण कार्य में दरारें सामने आने के बाद इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। शनिवार को आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम भी कई कारणों से चर्चा में रहा। बताया जा रहा है कि भवन के उद्घाटन को लेकर प्रशासन की ओर से एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग आमंत्रण पत्र जारी किए गए। शुरुआती निमंत्रण पत्रों में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के नाम शामिल थे, लेकिन बाद में कार्यक्रम की रूपरेखा में बदलाव किया गया। अंतिम आमंत्रण पत्र में मुख्य अतिथि और अध्यक्षता से जुड़े कॉलम हटाकर सिर्फ शुभारंभ कार्यक्रम का उल्लेख किया गया।
उद्घाटन कार्यक्रम से मंत्रियों की दूरी बनी चर्चा का विषय
पहले जारी किए गए निमंत्रण पत्रों में कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा को मुख्य अतिथि और गुरु खुशवंत साहेब को अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, कार्यक्रम के दिन दोनों नेताओं की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। इधर, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम में पहुंचकर भवन का उद्घाटन किया। आयोजन के दौरान आमंत्रण पत्रों में बदलाव और प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं होती रहीं।
निर्माण गुणवत्ता को लेकर उठे गंभीर सवाल
मंदिरहसौद तहसील भवन को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा इसकी निर्माण गुणवत्ता है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि लोकार्पण से पहले ही भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी थीं। इतनी बड़ी लागत से तैयार सरकारी भवन में उद्घाटन से पहले ही इस तरह की स्थिति सामने आने से निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण के दौरान गुणवत्ता जांच और तकनीकी निरीक्षण की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।
नो ड्यूज प्रमाण पत्र पर भी सवाल
मामले में लोक निर्माण विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। चर्चा है कि भवन की पूरी तकनीकी जांच किए बिना ठेकेदार को नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। अब मांग उठ रही है कि पूरे निर्माण कार्य की जांच कराई जाए और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल तहसील भवन के निर्माण की गुणवत्ता और उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।