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कच्चे तेल में लगी आग : ओपेक+ की आपात बैठक आज, क्या यूएई के जाने और होर्मुज संकट के बीच कागजी साबित होगा फैसला?

ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति गंभीर संकट में फंस गई है। दुनिया की करीब 20% तेल-गैस सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और महंगाई का दबाव बढ़ गया है। इस संकट से निपटने के लिए OPEC+ की आपातकालीन बैठक में उत्पादन बढ़ाने पर विचार हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित बढ़ोतरी वास्तविक कमी के मुकाबले बहुत कम होगी।

कीर्तिमान न्यूज
07 Jun 2026, 10:10 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार और आसमान छूती कीमतों पर काबू पाने के लिए OPEC+ (ओपेक प्लस) देशों के तेल मंत्रियों की आज (रविवार) एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन ऑनलाइन बैठक हो रही है। ईरान युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इस संकट से निपटने के लिए संगठन उत्पादन कोटा बढ़ाने पर विचार कर रहा है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों को अंदेशा है कि ओपेक+ की यह कवायद 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो सकती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर

फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हमलों के बाद से रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे संवेदनशील रूट 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पूरी तरह बंद है।

  • दोगुनी हुईं कीमतें: इस नाकेबंदी के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, जिसने दुनिया भर में रिकॉर्डतोड़ महंगाई की नई लहर पैदा कर दी है।

  • 2 करोड़ बैरल का संकट: दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा (करीब 20%) इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही ठप होने से रिफाइनरियों के पास स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।

राहत या सिर्फ कागजी खानापूर्ति?

डेटा और रिसर्च फर्म रैस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) के मुख्य विश्लेषक जॉर्ज लियोन के अनुसार, ओपेक प्लस देश संकट को भांपते हुए अपने उत्पादन कोटे में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी का एलान कर सकते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है:

  • सीमित क्षमता: ओपेक+ के 21 सदस्य देशों में से केवल मुट्ठी भर देशों (रूस, इराक, अल्जीरिया और ओमान) के पास ही वास्तव में उत्पादन तुरंत बढ़ाने की 'स्पेयर कैपेसिटी' (अतिरिक्त क्षमता) है। बाकी देश बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं।

  • 1 करोड़ बैरल की भारी गिरावट: ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने से पहले ओपेक+ का दैनिक उत्पादन लगभग 4.3 करोड़ बैरल था। अमेरिकी नाकेबंदी और समुद्र में टैंकरों के फंसे होने के कारण यह गिरकर 3.3 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है।

  • केपलर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी के चलते वास्तविक सप्लाई कागजी दावों से कहीं ज्यादा कम हो चुकी है।

UAE की 'बगावत' से ओपेक+ के वजूद पर संकट

इस वैश्विक संकट के बीच ओपेक संगठन खुद अंदरूनी फूट से कमजोर हो चुका है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा हाल ही में ओपेक छोड़ने के अप्रत्याशित फैसले ने संगठन की रीढ़ तोड़ दी है।

क्यों अलग हुआ यूएई?

यूएई के पास तेल उत्पादन की भारी अतिरिक्त क्षमता है। वह ओपेक के कड़े उत्पादन प्रतिबंधों (Production Cuts) से मुक्त होकर मनचाहा तेल बेचना चाहता है ताकि इस ऊंचे दाम वाले बाजार से अपना रेवेन्यू (राजस्व) अधिकतम कर सके।

विशेषज्ञों की चेतावनी: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि सऊदी अरब के बाद संगठन के सबसे मजबूत स्तंभ यूएई की राह पर इराक या अन्य देश भी चल पड़े, तो यह ओपेक+ के एकाधिकार (Monopoly) के अंत की शुरुआत होगी।

चीन बना दुनिया का एकमात्र सहारा

मौजूदा हालात में अगर तेल की कीमतें $150 या $200 प्रति बैरल के पार नहीं गई हैं, तो इसका श्रेय केवल चीन को जाता है।

  • केपलर के वरिष्ठ विश्लेषक हुमायूं फलकशाही के मुताबिक, चीन इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार से अपनी सामान्य जरूरत से बहुत कम तेल खरीद रहा है।

  • इसकी जगह, चीन चालाकी से अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) को खाली कर घरेलू जरूरतें पूरी कर रहा है। चीन की इस रणनीति के कारण बाजार में मांग थोड़ी थमी हुई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल एकमात्र लाइफलाइन बनी हुई है।

आगे क्या?

आज होने वाली ओपेक+ की बैठक के फैसलों पर सोमवार को खुलने वाले एशियाई और अमेरिकी शेयर व कमोडिटी बाजारों की पैनी नजर रहेगी। यदि संगठन किसी ठोस और वास्तविक सप्लाई बहाली का रोडमैप नहीं दे पाया, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम उपभोक्ताओं की जेब को और बुरी तरह झुलसाने वाली हैं।

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