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GDS भर्ती फर्जीवाड़े में आरोपी गिरफ्तार
GDS भर्ती फर्जीवाड़े में आरोपी गिरफ्तार
रायगढ़

GDS भर्ती में फर्जीवाड़ा : सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार 

रायगढ़ पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी अंकसूची तैयार कर लाखों रुपये की ठगी करने वाले मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर को कोरबा से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने GDS भर्ती में दो अभ्यर्थियों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए थे।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 14 Jul 2026, 04:02 PM · अपडेट: 13 Oct 2026, 07:25 PM
रायगढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये की ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को पुलिस ने कोरबा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। इस मामले में पुलिस पहले ही दो अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पूरा मामला रायगढ़ कोतवाली थाना क्षेत्र का है।पुलिस के अनुसार, जुलाई 2023 में भारतीय डाक विभाग ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) पदों के लिए ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। 
इसी दौरान सक्ती जिले के नरेंद्र कुमार और जांजगीर-चांपा जिले की सोनम साहू ने कक्षा 10वीं की अंकसूची के आधार पर आवेदन किया था। इन दोनों का चयन रायगढ़ डाक संभाग के बर्रा और सुलेसा शाखा में डाकपाल पद के लिए हो गया था। 

सत्यापन में खुला फर्जी दस्तावेजों का राज 

नियुक्ति से पहले दस्तावेजों की जांच के दौरान दोनों अभ्यर्थियों की अंकसूचियों का सत्यापन तमिलनाडु बोर्ड से कराया गया। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों अंकसूचियां फर्जी थीं और बोर्ड द्वारा ऐसी कोई अंकसूची जारी ही नहीं की गई थी। इसके बाद डाकघर अधीक्षक की शिकायत पर रायगढ़ कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस जांच के दौरान फरवरी 2026 में दोनों अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में उन्होंने बताया कि नौकरी की तलाश के दौरान उनकी पहचान कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर (47 वर्ष) से हुई थी। आरोप है कि विनोद ने सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर दोनों से पैसे की मांग की थी।अ 

नौकरी दिलाने के नाम पर लिए लाखों रुपये 

पुलिस के मुताबिक, विनोद कुमार राठौर ने नौकरी लगाने के लिए 3 से 3.50 लाख रुपये की मांग की थी। नरेंद्र कुमार ने आरोपी को 3.50 लाख रुपये दिए थे, जबकि सोनम साहू ने नियुक्ति मिलने के बाद भुगतान करने की बात कही थी। इसके बाद आरोपी ने दोनों को फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराईं, जिनका इस्तेमाल उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में किया। दस्तावेज सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद दोनों अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। पुलिस ने उनके पास से फर्जी अंकसूचियां और वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेज जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था। वहीं, मामले का मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर घटना के बाद से फरार था। 

नकली नोट मामले में भी काट चुका है सजा 

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि विनोद कुमार राठौर वर्ष 2013 के नकली नोट प्रकरण में आरोपी रह चुका है। इस मामले में उसे 10 साल की सजा हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा ठगी के काम में सक्रिय हो गया और युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे ऐंठने लगा।
रायगढ़ में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि वह कोरबा में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम कोरबा पहुंची और आरोपी विनोद कुमार राठौर को हिरासत में लेकर रायगढ़ लाई। 

न्यायालय ने भेजा जेल 

पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। रायगढ़ एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत लंबे समय से फरार आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का प्रयास करने वाले और ऐसे गिरोह चलाने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
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