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बस्तर को वैश्विक व्यापार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम
बस्तर को वैश्विक व्यापार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम
छत्तीसगढ़

बस्तर के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार : 4 घंटे में समुद्र तक, बदलेगी विकास की तस्वीर

रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) बस्तर के लिए विकास की नई राह खोलने जा रहा है। इस 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जगदलपुर से विशाखापट्टनम की दूरी घटकर मात्र 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी। इससे बस्तर सीधे समुद्री बंदरगाह और वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जुड़ जाएगा। परियोजना के जरिए परिवहन लागत में कमी आएगी और बस्तर की कॉफी, इमली, महुआ उत्पाद व ढोकरा शिल्प जैसे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
19 Apr 2026, 06:21 PM
रायपुर

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए विकास का एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD (Raipur–Visakhapatnam Economic Corridor)) अब सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बस्तर को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाला ‘गेमचेंजर’ साबित होने जा रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर न सिर्फ दूरी घटाएगा, बल्कि बस्तर जैसे लैंड-लॉक्ड क्षेत्र को समुद्री व्यापार से सीधे जोड़ देगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर जगदलपुर से विशाखापट्टनम की दूरी मात्र 3.5 से 4 घंटे में तय की जा सकेगी, जो अभी 7 से 9 घंटे तक लगती है।

घाटों की बाधा खत्म, सफर होगा आसान और तेज

वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम का रास्ता ओडिशा के कोरापुट और घुमावदार घाटों से होकर गुजरता है, जहां भारी वाहनों को समय और ईंधन दोनों की भारी खपत झेलनी पड़ती है। लेकिन नया कॉरिडोर पूरी तरह सीधा और हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल मार्ग होगा। इससे न केवल यात्रा समय में लगभग 50% की कमी आएगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत भी काफी घट जाएगी। लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव बस्तर से निर्यात होने वाले उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा।

नबरंगपुर इंटरचेंज बनेगा ‘गेटवे टू बस्तर’

इस कॉरिडोर की सबसे अहम कड़ी ओडिशा का नबरंगपुर इंटरचेंज है। जगदलपुर से मात्र 50-60 किलोमीटर की दूरी तय कर वाहन सीधे इस हाईवे से जुड़ सकेंगे। यह इंटरचेंज बस्तर को सीधे रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर और आगे विशाखापट्टनम पोर्ट से जोड़ने वाला रणनीतिक प्रवेश द्वार बनेगा। इससे बस्तर का संपर्क सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों से स्थापित हो जाएगा, जो अब तक एक बड़ी बाधा रही है।

बस्तर के उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

अब यहां की प्रसिद्ध वस्तुएं जैसे—

  • बस्तर की अरेबिका कॉफी
  • जैविक इमली
  • महुआ आधारित उत्पाद
  • ढोकरा शिल्प

सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक कम लागत और तेज समय में पहुंच सकेंगी।

इससे न केवल किसानों और कारीगरों की आय बढ़ेगी, बल्कि बस्तरिया ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान मिलेगी।

आदिवासी अंचलों में आर्थिक क्रांति की उम्मीद

बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे आकांक्षी जिलों में इस कॉरिडोर से व्यापक सामाजिक-आर्थिक बदलाव की उम्मीद है।

बेहतर कनेक्टिविटी से—

  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी
  • छोटे उद्योगों को बाजार मिलेगा
  • युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में हजारों नई नौकरियां सृजित होने की संभावना है।

खनिज संपदा को मिलेगा नया बाजार

बस्तर क्षेत्र लौह अयस्क और अन्य खनिज संसाधनों से समृद्ध है। यह कॉरिडोर इन खनिजों को तेज और सस्ते परिवहन के जरिए विशाखापट्टनम बंदरगाह तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके चलते निर्यात में वृद्धि होगी और क्षेत्र में नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

बेहतर सड़क संपर्क से बस्तर का पर्यटन उद्योग भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

विश्व प्रसिद्ध स्थल जैसे—

  • बस्तर दशहरा
  • दंतेश्वरी मंदिर
  • ढोलकल गणेश
  • कुटुमसर गुफा
  • चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात

अब अधिक आसानी से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की पहुंच में होंगे।

इससे न केवल पर्यटन राजस्व बढ़ेगा, बल्कि बस्तर की आदिवासी संस्कृति को वैश्विक पहचान भी मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक इंजीनियरिंग

इस परियोजना की खास बात यह है कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर भी पूरा ध्यान दिया गया है। केशकाल घाटी क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है, जो छत्तीसगढ़ की पहली ऐसी टनल होगी। यह मार्ग उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से गुजरता है, लेकिन डिजाइन ऐसा है कि वन्यजीवों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा—

  • मंकी कैनोपी ब्रिज
  • एनिमल अंडरपास
  • ओवरपास

जैसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं ताकि मानव और वन्यजीव सह-अस्तित्व बना रहे।

16,491 करोड़ की लागत से बदल रहा बस्तर का भविष्य

करीब 16,491 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 464 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बस्तर के लिए किसी आर्थिक जीवनरेखा से कम नहीं है। यह परियोजना न केवल छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सेतु का काम करेगी।

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