ग्रामीणों का दर्द : बेघर होने पर मां ने पूछा-कहां ले जाएं बच्चे, मलबे पर बैठकर रोते रहे लोग
राजधानी रायपुर के नकटी गांव में विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 घरों को ध्वस्त कर दिया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि बारिश के मौसम में बेघर नहीं करने का आश्वासन देने के बावजूद अगले ही दिन बुलडोजर चला दिया गया।
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कीर्तिमान न्यूज
03 Jul 2026, 09:10 AM
रायपुर
राजधानी रायपुर की बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर, नकटी गांव में 'विधायक कॉलोनी' बनाने के लिए प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए करीब 80 आशियानों को मलबे में तब्दील कर दिया।
सबसे संवेदनहीन बात यह है कि यह कार्रवाई ठीक उस वक्त की गई है जब मानसून सिर पर है और प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हो चुका है। सिर से छत छिन जाने के बाद प्रभावित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
आश्वासन दिया बारिश में नहीं करेंगे बेघर, अगले दिन चला दिया बुलडोजर
इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर एक पीड़ित महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो सिस्टम की बेरहमी की गवाही दे रहा है। वीडियो में महिला रोते हुए अपना दर्द बयां कर रही है: "हमें आश्वासन दिया गया था, सबके सामने बात हुई थी कि बारिश के दिनों में हमें बेघर नहीं किया जाएगा। लेकिन अगले ही दिन सुबह-सुबह बुलडोजर लेकर आ गए।
पीड़ित ने सुनाई आपबीती, नम हो गई आंखें
ताकत के बल पर हमारे सालों की मेहनत से बने घरों को रौंद दिया गया। हमारा पूरा सामान खुले आसमान के नीचे बिखरा पड़ा है।" महिला को इस तरह फूट-फूटकर रोता देख अपना दर्द सुनाती एक मांवहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता भी जमीन पर डटे थे। पीड़ित महिला जब अपनी आपबीती सुना रही थी, तो वहां मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बेबस नजर आए और सिर झुकाकर चुपचाप उसकी चीत्कार सुनते रहे।
कैसे रहेगा एक कमरें में पुरा परिवार
प्रशासन का दावा है कि बेघर हुए लोगों को नया रायपुर के सेक्टर-30 में ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैट्स दिए गए हैं। लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि यह पुनर्वास नहीं बल्कि उनके साथ एक क्रूर मजाक है।
एक कमरे में पूरा कुनबा: पीड़ित महिला ने बताया कि उन्हें जबरन चार मंजिला ईडब्ल्यूएस बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां रहने के लिए सिर्फ एक कमरा मिला है। महिला का सवाल है, "उस एक कमरे में सास, ससुर, देवर, पति और बच्चे... पूरा परिवार एक साथ कैसे रहेगा?"
बुजुर्गों के लिए आफत: पीड़ितों ने बताया कि उन्हें चार मंजिला ईडब्ल्यूएस मकानों के ऊपरी फ्लोर पर कमरा तो दे दिया गया है, लेकिन वहां ऊपर जाने के लिए लिफ्ट तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों और बीमार लोगों का ऊपर-नीचे आना-जाना पूरी तरह दूभर हो गया है।
सिर छिपाने की जगह ढूंढ रहे लोगो
जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या माननीयों (विधायकों) के आलीशान घरों के लिए गरीब परिवारों को इस तरह बारिश के मौसम में बेघर करना जायज है? एक तरफ जहां सत्ता और सियासत के लिए नई कॉलोनियां काटी जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही जमीन पर बेगाने हुए ये लोग अब इस भीषण बारिश में सिर छिपाने की जगह ढूंढ रहे हैं।